सेंट स्टीफंस कॉलेज में रचा गया इतिहास: 145 साल बाद पहली बार महिला प्रिंसिपल की नियुक्ति, जानें कौन हैं प्रो. सुसान एलियास
Up kiran, Digital Desk : दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज ने अपने 145 साल के गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, कॉलेज प्रशासन ने प्रोफेसर सुसान एलियास को संस्थान की नई प्रिंसिपल नियुक्त किया है। यह पहली बार है जब 1881 में स्थापित इस कॉलेज की कमान किसी महिला के हाथों में सौंपी गई है।
1 जून से संभालेंगी कार्यभार, डॉ. पॉल स्वरूप ने जारी किया नोटिस
मंगलवार को कॉलेज की ओर से जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रोफेसर सुसान एलियास 1 जून, 2026 से अपना पदभार ग्रहण करेंगी। वह कॉलेज की 14वीं प्रिंसिपल होंगी। इस ऐतिहासिक नियुक्ति के नोटिस पर दिल्ली के बिशप और कॉलेज की सुप्रीम काउंसिल के चेयरमैन, Rt Revd डॉ. पॉल स्वरूप के हस्ताक्षर हैं। लंबे समय से प्रशासनिक और कानूनी उलझनों के कारण प्रिंसिपल का पद रिक्त चल रहा था, जिसे अब प्रो. सुसान की नियुक्ति के साथ भर दिया गया है।
तीन दशकों का अनुभव और शानदार करियर ग्राफ
प्रोफेसर सुसान एलियास का शैक्षणिक और प्रशासनिक करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। उनके पास 30 वर्षों से भी अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से दक्षिण भारत के नामी इंजीनियरिंग और शोध संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। सेंट स्टीफंस आने से पहले वह चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (उत्तर प्रदेश) में प्रो-वाइस चांसलर (रिसर्च) के पद पर कार्यरत थीं।
शोध और शिक्षा जगत में बड़ा नाम
प्रो. सुसान का अनुभव केवल अध्यापन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने प्रबंधन और शोध के क्षेत्र में भी कई अहम पदों को संभाला है:
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हिंदुस्तान यूनिवर्सिटी: अक्टूबर 2024 से दिसंबर 2025 तक डायरेक्टर (रिसर्च) के रूप में कार्य किया।
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VIT (वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी): यहाँ उन्होंने स्कूल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की प्रोफेसर और डीन, तथा सेंटर फॉर एडवांस्ड डेटा साइंस की डिप्टी डायरेक्टर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीदें
सेंट स्टीफंस कॉलेज न केवल अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है, बल्कि यह देश के कई दिग्गजों की मातृ संस्था भी रहा है। ऐसे में प्रो. सुसान एलियास की नियुक्ति से उम्मीद जताई जा रही है कि कॉलेज के बुनियादी ढांचे, शोध कार्यों और शैक्षणिक वातावरण को एक नई दिशा मिलेगी।