Independence Day 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से गूंजेगा 'वंदे मातरम', जानिए इस ऐतिहासिक राष्ट्रगीत का पूरा इतिहास
भारत इस साल 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) बहुत ही हर्षोल्लास और गौरव के साथ मनाने जा रहा है। देश के इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय पर्व पर इस बार कुछ बेहद खास और अनूठा होने जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह के दौरान दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से आधिकारिक तौर पर 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत गाया जाएगा। इस भव्य आयोजन को लेकर पूरे देश में जबरदस्त उत्साह का माहौल है, ऐसे में यह जानना बेहद दिलचस्प हो जाता है कि हमारे इस पावन राष्ट्रगीत को किसने और कब लिखा था तथा इसका हमारे स्वतंत्रता संग्राम में क्या महत्व रहा है।
किसने लिखा है राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम'?
भारत का राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' महान बंगाली उपन्यासकार और कवि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chattopadhyay) ने लिखा था। इस अमर गीत की रचना 7 नवंबर 1876 को की गई थी। बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' (Anandmath) में शामिल किया गया, जो 1882 में प्रकाशित हुआ था। यह गीत मुख्य रूप से संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में लिखा गया है, जिसमें मातृभूमि (भारत माता) की वंदना की गई है।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 'वंदे मातरम' का ऐतिहासिक सफर
'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं बल्कि ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता सेनानियों का सबसे बड़ा प्रेरणा स्त्रोत और उद्घोष बन गया था।
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पहला गान: इस गीत को सबसे पहले साल 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था, जिसे खुद महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने स्वर दिया था।
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बंग-भंग आंदोलन: सन 1905 में बंगाल के विभाजन के दौरान 'वंदे मातरम' देश की आजादी के दीवानों का मुख्य नारा और हथियार बन गया था। ब्रिटिश सरकार ने इस गीत के सार्वजनिक गायन पर प्रतिबंध भी लगाने की कोशिश की थी, लेकिन देशवासियों ने इसकी परवाह किए बिना इसे हर गली-कूचे में गूंजाया।
राष्ट्रगीत से जुड़ा संवैधानिक महत्व
आजादी के बाद, भारत की संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत (National Song) के रूप में औपचारिक रूप से अपनाया। राष्ट्रगान 'जन गण मन' के साथ-साथ 'वंदे मातरम' को भी देश में वही मान-सम्मान और राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त है। अब 2026 के 80वें स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर लाल किले पर इसका गूंजना हर भारतवासी के लिए गर्व और ऐतिहासिक पल होगा।