NEET Topper Success Story: 11वीं से फेसबुक से दूरी, इंस्टाग्राम से भी नहीं कोई नाता; नीट टॉपर ने बताया अपनी महासफलता का सीक्रेट फार्मूला
देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक नीट यूजी (NEET UG) को क्रैक करना हर मेडिकल एस्पिरेंट का सपना होता है। इस परीक्षा में टॉप रैंक हासिल करना कोई आम बात नहीं है, इसके लिए सालों की कड़ी मेहनत, एकाग्रता और सबसे बढ़कर 'कुर्बानी' की जरूरत होती है। आज हम आपको एक ऐसे ही नीट टॉपर की सफलता की कहानी (Success Story) बताने जा रहे हैं, जिसने सोशल मीडिया के इस आधुनिक दौर में एक ऐसा कदम उठाया जिसकी कल्पना आज की जनरेशन के लिए बेहद मुश्किल है। टॉपर ने बताया कि कैसे महज 11वीं कक्षा से ही उन्होंने फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी लोकप्रिय ऐप्स से पूरी तरह दूरी बना ली और आज सफलता का परचम लहरा दिया।
रील्स और स्क्रोलिंग की दुनिया से खुद को किया पूरी तरह 'डिटॉक्स'
आजकल जहां युवाओं का एक बड़ा हिस्सा इंस्टाग्राम रील्स देखने और फेसबुक फीड स्क्रोल करने में घंटों बिता देता है, वहीं इस नीट टॉपर ने अपनी तैयारी के शुरुआती दिनों में ही इसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान लिया था। टॉपर के मुताबिक, 11वीं क्लास में आते ही उन्होंने तय कर लिया था कि जब तक वह डॉक्टर बनने के अपने सपने के करीब नहीं पहुंच जाते, तब तक वह इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपना अकाउंट तक नहीं बनाएंगे। उन्होंने स्मार्टफोन का इस्तेमाल सिर्फ ऑनलाइन क्लासेस, डाउट सॉल्विंग और पढ़ाई से जुड़े जरूरी स्टडी मैटेरियल के लिए ही किया।
टॉपर ने बताया सफलता का मूलमंत्र: कंसिस्टेंसी और सेल्फ-स्टडी
अपनी स्ट्रेटेजी शेयर करते हुए नीट टॉपर ने बताया कि सोशल मीडिया से दूरी बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि उनका ध्यान कभी नहीं भटका। वह रोजाना 7 से 8 घंटे की सेल्फ-स्टडी को बिना चूके पूरा करते थे। उन्होंने कहा, "नीट जैसी परीक्षा में सफलता के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप 14-16 घंटे पढ़ें, बल्कि जरूरी यह है कि आप जितने भी घंटे पढ़ें, पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ें। एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों को लाइन-बाय-line घोटकर पीना और हर हफ्ते मॉक टेस्ट देकर अपनी गलतियों को सुधारना ही मेरी सफलता की असली चाबी रही।"
माता-पिता और टीचर्स का सपोर्ट सिस्टम रहा सबसे मजबूत
तैयारी के लंबे और तनावपूर्ण सफर के दौरान खुद को मोटिवेटेड रखने के सवाल पर टॉपर ने अपने परिवार और कोचिंग टीचर्स को इसका श्रेय दिया। उन्होंने बताया कि जब भी कभी मॉक टेस्ट में नंबर कम आते थे या पढ़ाई का प्रेशर बढ़ता था, तो वह सोशल मीडिया पर जाने के बजाय अपने माता-पिता से बात करते थे या कुछ देर शांत माहौल में वॉक करते थे। उनके पैरेंट्स ने भी यह सुनिश्चित किया कि घर का माहौल पूरी तरह से शांत और पढ़ाई के अनुकूल रहे, जिससे उन्हें डिप्रेशन या अकेलेपन का अहसास कभी नहीं हुआ।
नीट एस्पिरेंट्स के लिए टॉपर की खास सलाह
भविष्य में नीट परीक्षा में बैठने वाले लाखों छात्रों को संदेश देते हुए टॉपर ने कहा कि डिजिटल डिस्ट्रैक्शन (डिजिटल भटकाव) आज के समय में छात्रों की असफलता का सबसे बड़ा कारण है। अगर आप सच में देश के किसी टॉप सरकारी मेडिकल कॉलेज में अपनी सीट पक्की करना चाहते हैं, तो आपको कुछ सालों के लिए अस्थाई सुख और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया को छोड़ना ही होगा। एक बार जब आप अपने लक्ष्य को पा लेते हैं, तो यह सारी कुर्बानियां बेहद छोटी लगने लगती हैं।