रेलवे कर्मचारियों को झटका: सरकारी क्वार्टर का किराया बढ़ा, 1 जुलाई से लागू हुईं नई दरें
रेलवे कॉलोनियों में आवंटित सरकारी आवासों में रह रहे लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बड़ी खबर है। रेलवे बोर्ड ने अपने सरकारी आवासों के लाइसेंस शुल्क (स्टैंडर्ड रेंट) में तीन साल बाद आधिकारिक संशोधन कर दिया है।
बोर्ड द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, बढ़ी हुई दरें 1 जुलाई 2026 से पूर्वप्रभावी (रेट्रोस्पेक्टिव) रूप से लागू मानी जाएंगी। इस संशोधन के बाद रेलकर्मियों को अपने आवंटित आवास के बदले पहले की तुलना में अधिक मासिक शुल्क चुकाना होगा, जिसका सीधा असर उनकी सैलरी स्लिप में होने वाली मासिक कटौती पर पड़ेगा।
प्लिंथ एरिया बनेगा आधार, 10 रुपये से 630 रुपये तक का इजाफा
रेलवे बोर्ड ने इस बार केवल क्वार्टर की श्रेणी ही नहीं, बल्कि उसके प्लिंथ एरिया यानी कुल फर्श क्षेत्रफल को भी किराया निर्धारण का मुख्य आधार बनाया है। संशोधित व्यवस्था के तहत अलग-अलग श्रेणी के आवासों के लाइसेंस शुल्क में 10 रुपये से लेकर 630 रुपये प्रतिमाह तक की बढ़ोतरी की गई है। क्षेत्रफल के आधार पर स्लैब तय होने से अब एक ही टाइप के क्वार्टर में बड़े साइज वाले आवास के लिए अधिक किराया देय होगा।
तीन साल बाद हुआ बदलाव, सब-स्टैंडर्ड क्वार्टर नई दरों से बाहर
सरकारी रेल आवासों के लाइसेंस शुल्क में इससे पूर्व संशोधन 1 जुलाई 2023 को लागू किया गया था। ठीक तीन वर्ष की अवधि बीतने के बाद रेलवे बोर्ड ने विस्तृत समीक्षा कर नया किराया ढांचा जारी किया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधित किराया वृद्धि सब-स्टैंडर्ड (मानक से निम्न) श्रेणी के क्वार्टरों पर लागू नहीं होगी, उनके लिए पुरानी दरें ही प्रभावी रहेंगी।
टाइप-1 और टाइप-2 आवासों का नया किराया स्लैब
बोर्ड द्वारा तय नए प्रारूप के तहत प्राथमिक श्रेणियों में भी क्षेत्रफल के अनुसार शुल्क तय किया गया है:
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टाइप-1 क्वार्टर: क्षेत्रफल के आधार पर इसका नया मासिक लाइसेंस शुल्क अब 130 रुपये से लेकर 220 रुपये के बीच निर्धारित किया गया है।
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टाइप-2 क्वार्टर: इस श्रेणी के आवासों के लिए कर्मियों को प्रतिमाह 280 रुपये से लेकर 380 रुपये तक का भुगतान करना होगा।
टाइप-3 श्रेणी के लिए क्षेत्रफल अनुसार नई दरें
मध्यम श्रेणी के अधिकारियों और वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए बने टाइप-3 क्वार्टरों में भी क्षेत्रफल के अनुसार चार अलग-अलग स्लैब बनाए गए हैं:
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60 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल वाले आवास के लिए 470 रुपये प्रतिमाह तय किए गए हैं।
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60 से 65 वर्ग मीटर तक के क्वार्टर के लिए 530 रुपये मासिक शुल्क देना होगा।
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65 से 70 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के लिए 570 रुपये की दर निर्धारित की गई है।
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70 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले बड़े टाइप-3 आवासों के लिए कर्मचारियों को हर महीने 610 रुपये का लाइसेंस शुल्क चुकाना पड़ेगा।