गांव का पहला लेफ्टिनेंट बना किसान का बेटा सुमित, SSB में 8 बार हुआ फेल, अब UPSC CDS में AIR-4
संघर्ष, अटूट समर्पण और कभी हार न मानने वाले जज्बे की एक बेहद भावुक और प्रेरणादायी कहानी हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलकर सामने आई है। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले युवा सुमित ने सफलता का एक ऐसा नया इतिहास रच दिया है, जिसने पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है। सुमित अपने पूरे गांव के इतिहास में भारतीय थल सेना (Indian Army) में 'लेफ्टिनेंट' का पद हासिल करने वाले पहले युवा बन गए हैं। हालांकि, सफलता का यह रास्ता सुमित के लिए बिल्कुल आसान नहीं था। सेवा चयन बोर्ड (SSB) के साक्षात्कार में लगातार 8 बार असफलता का कड़वा घूंट पीने के बावजूद सुमित ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। अंततः अपनी 9वीं कोशिश में सुमित ने न केवल एसएसबी क्रैक किया, बल्कि प्रतिष्ठित यूपीएससी सीडीएस (UPSC CDS) परीक्षा में देश भर में ऑल इंडिया रैंक 4 (AIR-4) हासिल करके यह साबित कर दिया कि अगर इरादे बुलंद हों, तो हर नाकामी के आगे सफलता का परचम लहराया जा सकता है।
खेत की पगडंडियों से सेना के अफसर बनने तक का तय किया कठिन और संघर्षपूर्ण सफर
सुमित की यह ऐतिहासिक सफलता उन लाखों ग्रामीण युवाओं के लिए एक मशाल की तरह है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने की हिम्मत जुटाते हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे सुमित का बचपन से ही भारतीय सेना की वर्दी पहनने और देश सेवा करने का एक ही सपना था। उनके पिता दिन-रात खेतों में पसीना बहाकर अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाते थे। घर में पैसों की तंगी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और अंग्रेजी बोलने की हिचकिचाहट जैसी कई चुनौतियां सुमित के सामने हर कदम पर खड़ी थीं। लेकिन पिता की मेहनत और मां के आशीर्वाद ने सुमित के भीतर ऐसा हौसला भरा कि उन्होंने अपनी हर कमजोरी को अपनी ताकत में बदल दिया। उन्होंने बिना किसी महंगी कोचिंग के गांव में रहकर ही अपनी किताबों और self-study के दम पर यूपीएससी सीडीएस की लिखित परीक्षा की तैयारी शुरू की।
8 बार SSB में रिजेक्शन का झेला दर्द, पर टूटने नहीं दिया अपने देश सेवा का अटूट जज्बा
यूपीएससी की लिखित परीक्षा पास करना जितना कठिन होता है, उससे कहीं ज्यादा पेचीदा और चुनौतीपूर्ण भारतीय सशस्त्र बलों का 5 दिवसीय एसएसबी (Services Selection Board) इंटरव्यू माना जाता है। सुमित ने जब पहली बार एसएसबी का सामना किया, तो उन्हें असफलता मिली। इसके बाद एक-दो नहीं, बल्कि लगातार 8 बार सुमित एसएसबी बोर्ड से 'स्क्रीन आउट' या 'कॉन्फ्रेंस आउट' होकर खाली हाथ घर वापस लौटे। लगातार आठ बार असफलता मिलने के बाद कोई भी सामान्य युवा निराश होकर अपना रास्ता बदल लेता, लेकिन सुमित ने हर असफलता को अपनी कमियों को सुधारने के एक मौके के रूप में लिया। उन्होंने अपनी भाषा शैली, बॉडी लैंग्वेज और पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर बारीकी से काम किया। आखिरकार अपने 9वें प्रयास में जब सीडीएस का अंतिम परिणाम घोषित हुआ, तो उसमें सुमित का नाम देश भर में चौथे स्थान (AIR-4) पर चमक रहा था।
सुमित के गांव में दिवाली जैसा जश्न, किसान पिता की आंखों से छलक पड़े खुशी के आंसू
जैसे ही यूपीएससी सीडीएस परीक्षा के फाइनल रिजल्ट में सुमित की ऑल इंडिया रैंक 4 आने और लेफ्टिनेंट बनने की खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया। गांव के लोगों ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ सुमित का जोरदार स्वागत किया। सुमित के गांव का पहला सैन्य अधिकारी बनने पर ग्रामीणों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया और फूलों की पंखुड़ियों से पूरा रास्ता ढक दिया। अपने बेटे की इस ऐतिहासिक कामयाबी पर किसान पिता की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि एक किसान के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण क्या हो सकता है कि जिस बेटे ने खेतों में उनके साथ हल चलाया हो, वह अब देश की सीमाओं की रक्षा के लिए कंधे पर सितारे लगाकर लेफ्टिनेंट के रूप में तैनात होगा।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुमित की सफलता से बड़ी सीख
यूपीएससी, सेना और अन्य रक्षा परीक्षाओं की तैयारी में जुटे देश के लाखों युवाओं के लिए सुमित की यह कहानी केवल एक खबर नहीं, बल्कि सफलता का एक जीवित गुरुमंत्र है। सुमित का कहना है कि असफलता केवल इस बात का संकेत है कि सफलता का प्रयास पूरी शिद्दत से नहीं हुआ था। यदि आप अपनी गलतियों से सीखते हैं और बार-बार असफल होने के बाद भी अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। सुमित की यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि सफलता के लिए किसी बड़े शहर या महंगी अकादमियों की जरूरत नहीं होती, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में की गई निरंतर मेहनत ही इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचाती है।
ट्रेनिंग के बाद जल्द संभालेंगे सैन्य कमान, पूरे देश को सुमित के इस जज्बे पर है नाज
ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल करने के बाद अब सुमित जल्द ही प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA - Indian Military Academy), देहरादून में अपनी कठिन सैन्य ट्रेनिंग की शुरुआत करेंगे। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वे भारतीय सेना में एक कमीशन अधिकारी के रूप में लेफ्टिनेंट का पद संभालेंगे। सुमित की यह गौरवगाथा आज सोशल मीडिया पर जमकर शेयर की जा रही है और देश भर के लोग इस किसान के बेटे की लगन और जज्बे को सलाम कर रहे हैं। सुमित ने यह साबित कर दिया है कि भारत के गांवों की मिट्टी में वह ताकत है जो देश को महान नायक और अफसर देने की क्षमता रखती है।