NEET UG विवाद: 2024 की वो 'बदनाम' यादें और 2026 में क्यों फिर दहला सीकर?
Up kiran, Digital Desk : नीट यूजी 2026 की परीक्षा रद्द होने के फैसले ने एक बार फिर देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। 3 मई को हुई इस परीक्षा पर पेपर लीक का साया पड़ने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इसे निरस्त कर दिया है। इस घटना ने दो साल पहले, यानी 2024 में हुए उस भीषण विवाद की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने नीट की विश्वसनीयता पर कई बड़े सवाल खड़े किए थे। आखिर 2024 में ऐसा क्या हुआ था और राजस्थान का शिक्षा हब 'सीकर' बार-बार विवादों के केंद्र में क्यों आ जाता है? आइए विस्तार से समझते हैं।
2024 का 'असामान्य' रिजल्ट: जब 67 छात्रों ने एक साथ किया टॉप
साल 2024 की नीट परीक्षा इतिहास की सबसे विवादित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। जब रिजल्ट आया, तो पूरा देश हैरान रह गया क्योंकि पहली बार 67 छात्रों ने ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की थी।
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असंभव अंक: कई छात्रों के 718 और 719 अंक आए, जो तकनीकी रूप से मार्किंग स्कीम (सही पर +4, गलत पर -1) में संभव ही नहीं थे।
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ग्रेस मार्क्स का खेल: NTA ने सफाई दी कि समय की बर्बादी के बदले छात्रों को 'ग्रेस मार्क्स' दिए गए। भारी हंगामे और कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ये अंक हटाए गए और री-एग्जाम हुआ, जिसके बाद टॉपर्स की संख्या 67 से घटकर 17 रह गई।
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भारी मुद्रास्फीति (Inflation): नंबरों की इस 'बाढ़' के कारण कटऑफ इतनी ऊपर चली गई कि अच्छे अंक लाने वाले मेधावी छात्र भी सरकारी कॉलेजों में सीट पाने से वंचित रह गए।
सीकर: कोटा को टक्कर देने वाली 'नई कोचिंग फैक्ट्री' पर फिर उठे सवाल
राजस्थान का सीकर जिला, जो कभी केवल कृषि के लिए जाना जाता था, आज कोटा के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा कोचिंग हब बन चुका है। यहां के कोचिंग संस्थानों का रिजल्ट नेशनल एवरेज से 5-6 गुना ज्यादा रहता है। लेकिन इसी 'सफलता की दर' ने 2024 और अब 2026 में सीकर को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है।
2024 में सीकर का रहस्यमयी प्रदर्शन
2024 के विवाद के दौरान सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील नरेंद्र हुड्डा ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए थे। उन्होंने बताया था कि देश के टॉप 100 परीक्षा केंद्रों में से 71 राजस्थान के थे, जिनमें से अकेले 46 सीकर में थे। सीकर के केंद्रों पर सफलता दर लगभग 25% थी, जबकि राष्ट्रीय औसत महज 0.6% था। आरोप लगा कि यहां के प्राइवेट स्कूल संचालकों, इनविजिलेटर्स और कोचिंग माफियाओं के बीच गहरी सांठगांठ है, जिसने पेपर लीक और नकल को बढ़ावा दिया।
NEET 2026: क्या फिर सीकर से ही लीक हुआ पेपर?
नीट यूजी 2026 के रद्द होने के पीछे भी 'सीकर कनेक्शन' सबसे अहम कड़ी बनकर उभरा है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में कुछ गंभीर तथ्य सामने आए हैं:
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गैस पेपर का केंद्र: जांच में पता चला है कि केरल से चला पेपर सीकर के रास्ते झुंझुनूं, चूरू और नागौर तक बिका। सीकर के पीपराली रोड पर कंसल्टेंसी चलाने वाला राकेश मंडावरिया इस खेल का मुख्य किरदार बताया जा रहा है।
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हूबहू सवाल: सीकर और झुंझुनूं में कई छात्रों के पास जो 'गेस पेपर' मिला, उसमें 120 से 140 प्रश्न मुख्य परीक्षा से हूबहू मिल रहे थे। यानी 720 में से लगभग 600 अंकों का पेपर परीक्षा से पहले ही बाहर आ चुका था।
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लापरवाही का आरोप: खबर है कि परीक्षा के दिन ही कुछ छात्रों ने उद्योग नगर थाने में शिकायत दी थी, लेकिन उस समय पुलिस और NTA के स्थानीय को-ऑर्डिनेटर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
आज जब CBI ने इस मामले की बागडोर संभाल ली है, तो सबकी नजरें फिर से सीकर पर टिकी हैं। क्या यह केवल एक जिला है या पेपर लीक माफियाओं की सुरक्षित पनाहगाह? यह जांच का विषय है।