बड़ा झटका! पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट रद्द, छात्रों को अब दोबारा भरनी होगी चॉइस
चिकित्सा शिक्षा की तैयारी कर रहे देश भर के और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के हजारों मेडिकल छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में नीट यूजी 2026 (UP NEET UG 2026) के माध्यम से एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) पाठ्यक्रमों में दाखिला पाने की राह देख रहे अभ्यर्थियों को एक बार फिर से अपनी काउंसलिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGME), उत्तर प्रदेश द्वारा जारी किए गए ताजा और महत्वपूर्ण आदेश के अनुसार, पहले चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग के तहत पूर्व में घोषित किए गए सीट आवंटन (Seat Allotment) को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। इस अचानक हुए बड़े बदलाव के बाद छात्रों के बीच खलबली मच गई है क्योंकि जिन अभ्यर्थियों को पिछले चरणों में अपनी पसंद के कॉलेज मिल चुके थे, उन्हें भी अब नए सिरे से अपनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यह पूरा फैसला माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ द्वारा दिए गए हालिया आदेशों और निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर इस तरह का कड़ा और बड़ा कदम उठाना पड़ा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद क्यों लेना पड़ा DGME को यह कड़ा और बड़ा फैसला
किसी भी राज्य में मेडिकल काउंसलिंग जैसी पारदर्शी और संवेदनशील प्रक्रिया का सुचारू रूप से चलना छात्रों के भविष्य के लिए सबसे अहम होता है। उत्तर प्रदेश में जब नीट यूजी 2026 के पहले चरण के तहत 7 सितंबर को सीट अलॉटमेंट के नतीजे जारी किए गए थे, तब कई छात्रों को लगा था कि उनकी दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि, कानूनी पहलुओं और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्देशों के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पूर्व में अपनाई गई प्रक्रिया में कुछ ऐसे तकनीकी और प्रशासनिक फेरबदल जरूरी थे जिनके बिना काउंसलिंग की वैधता पर सवाल खड़े हो सकते थे। इसी कानूनी और विधिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए डीजीएमई (DGME UP) ने बिना किसी देरी के पारदर्शी रुख अपनाते हुए 7 सितंबर के उस पुराने सीट आवंटन को पूरी तरह से अमान्य घोषित कर दिया। अदालत के आदेशों का पालन करते हुए विभाग ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि आगे चलकर किसी भी छात्र के भविष्य पर संकट के बादल न मंडराएं और राज्य के सरकारी तथा निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की पूरी प्रक्रिया नियमों के एकदम दायरे में रहकर ही पूरी की जा सके।
छात्रों के लिए नया संशोधित शेड्यूल: कब से कब तक भर सकेंगे चॉइस और कब आएगा नया अलॉटमेंट रिजल्ट
चूंकि पहले दौर की काउंसलिंग और सीट आवंटन को रद्द कर दिया गया है, इसलिए उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक नया संशोधित समय सारणी (Revised Schedule) आधिकारिक पोर्टल पर लाइव कर दिया है। इसके तहत जिन अभ्यर्थियों को दोबारा से अपनी कॉलेज और कोर्स की प्राथमिकताएं भरनी हैं, उनके लिए ऑनलाइन च्वाइस फिलिंग की विंडो शुरू हो चुकी है। छात्र आधिकारिक वेबसाइट upneet.gov.in पर जाकर अपने क्रेडेंशियल के माध्यम से लॉगिन कर सकते हैं और 21 सितंबर की शाम 5 बजे तक अपनी नई चॉइस भरकर उन्हें सुरक्षित रूप से लॉक कर सकते हैं। इसके तुरंत बाद, विभाग द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा और संशोधित पहले चरण का नया सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 22 सितंबर को आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया जाएगा। जिन छात्रों को इस नए आवंटन में सीटें मिलेंगी, वे सभी अभ्यर्थी आगामी 23 सितंबर से 26 सितंबर के बीच अपने अलॉटमेंट लेटर को डाउनलोड कर सकेंगे और निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कॉलेजों व नोडल सेंटर्स पर जाकर अपनी एडमिशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर पाएंगे।
चॉइस लॉक करने के नियम, सिक्योरिटी मनी और एडमिशन से जुड़ी जरूरी सावधानियां
इस पूरी संशोधित काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान छात्रों को कुछ बेहद महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों और नियमों का विशेष रूप से पालन करना होगा, अन्यथा छोटी सी चूक से उनकी मेहनत पर पानी भी फेर सकता है। महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन या फॉर्म खुला छोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक छात्र के लिए अपनी भरी गई चॉइस को समय सीमा के भीतर 'लॉक' करना अनिवार्य है। यदि कोई उम्मीदवार तय वक्त तक अपनी चॉइस लॉक नहीं करता है, तो उसे स्वतः ही आगामी सीट आवंटन प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा और एक बार लॉक होने के बाद उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, काउंसलिंग के दौरान जमा की जाने वाली सिक्योरिटी मनी से जुड़े नियमों का भी पूरा ध्यान रखना होगा, जो कि ट्यूशन फीस में एडजस्ट नहीं की जाएगी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद वैध बैंक खातों में वापस कर दी जाएगी। यदि किसी छात्र को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलता है, तो उसे सीधे उस कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा, जबकि प्राइवेट कॉलेजों के लिए निर्धारित नोडल सेंटर पर कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों से बचने के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा रखें और समय रहते अपनी सारी औपचारिकताएं पूरी कर लें।