Up kiran,Digital Desk : दक्षिण कोरिया की राजनीति में बुधवार को बड़ा मोड़ आया, जब सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल के कार्यकाल के दौरान लगाए गए मार्शल लॉ को संविधान के खिलाफ विद्रोह करार दिया। अदालत ने इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री और यून सुक-योल के करीबी सहयोगी हान डक-सू को 23 साल की जेल की सजा सुनाई। यून प्रशासन से जुड़े विद्रोह मामलों में इसे पहला बड़ा दोषसिद्धि फैसला माना जा रहा है।
अदालत ने क्यों माना मार्शल लॉ को ‘खुद का तख्तापलट’
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यून सुक-योल की ओर से मार्शल लॉ लागू करने का आदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश थी। कोर्ट के अनुसार यह कदम एक तरह का ‘सेल्फ कू’ यानी खुद का तख्तापलट था। संसद और चुनाव कार्यालयों में सेना व पुलिस की तैनाती को अदालत ने गंभीर अस्थिरता फैलाने वाला और संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
पूर्व पीएम हान डक-सू की भूमिका पर सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री हान डक-सू ने मंत्री परिषद की बैठक बुलाकर मार्शल लॉ आदेश को प्रक्रियात्मक वैधता देने की कोशिश की। अदालत के मुताबिक, यही कदम उन्हें विद्रोह में सक्रिय भागीदार बनाता है।
दस्तावेजों में हेरफेर और झूठी गवाही भी साबित
फैसले में यह भी कहा गया कि हान डक-सू मार्शल लॉ से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर, सबूत नष्ट करने और शपथ के तहत झूठ बोलने के दोषी पाए गए हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि उन्होंने संविधान की रक्षा के अपने दायित्व की अनदेखी की और इस सोच के साथ आगे बढ़े कि यह विद्रोह सफल हो सकता है।
लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी बताया गया फैसला
अदालत ने अपने आदेश में चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह के कृत्य देश को एक बार फिर उस दौर में धकेल सकते थे, जहां नागरिक अधिकारों का दमन होता था और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ जाती थीं।
सजा के बाद सीधे जेल भेजे गए हान डक-सू
फैसला सुनाए जाने के बाद हान डक-सू को तुरंत जेल भेज दिया गया। इससे पहले वे हिरासत में नहीं थे। गौर करने वाली बात यह है कि स्वतंत्र अभियोजक ने उनके लिए 15 साल की सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने 23 साल की सजा सुनाकर कड़ा रुख अपनाया। हान डक-सू को इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है।
यून सुक-योल की मुश्किलें और बढ़ीं
यह फैसला पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ चल रहे मामलों के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। यून पर विद्रोह का मास्टरमाइंड होने का आरोप है और स्वतंत्र अभियोजक उनके लिए मृत्युदंड तक की मांग कर चुके हैं। यून के खिलाफ विद्रोह मामले में 19 फरवरी को फैसला आने की संभावना है। फिलहाल वे कई मामलों में जेल में हैं और सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर चुके हैं।
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