Up kiran,Digital Desk :उत्तर प्रदेश की सियासत में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को एक बार फिर अपने पुराने और आक्रामक तेवर दिखाए। राजधानी लखनऊ में चुनावी हुंकार भरते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा किसी की बैसाखी का सहारा नहीं लेगी। मायावती ने गठबंधन की तमाम संभावनाओं को सिरे से खारिज करते हुए 'एकला चलो' की नीति पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में मिले सरकारी बंगले और अपनी सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर विरोधियों को करारा जवाब दिया है।
गठबंधन की खबरें 'कोरी अफवाह' और साजिश
मायावती ने मीडिया और सियासी गलियारों में चल रही गठबंधन की चर्चाओं को "फेक न्यूज" और विरोधियों की साजिश करार दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सोच हमेशा से संकीर्ण और अंबेडकर विरोधी रही है। ये पार्टियां दलितों और वंचितों के आत्म-सम्मान को पचा नहीं पातीं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि विरोधियों द्वारा फैलाए जा रहे झूठ और प्रलोभन के जाल में न फंसें, क्योंकि ये केवल बसपा को कमजोर करने की चालें हैं।
एआई नहीं, संविधान और लोकतंत्र बचाने की जरूरत
देश में चल रही तकनीकी चर्चाओं पर कटाक्ष करते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि आजकल लोकतंत्र और संविधान को मजबूत करने की बजाय 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) को सफलता की कुंजी बताया जा रहा है, जो कि महज एक स्वार्थी एजेंडा है। उनका इशारा साफ था कि तकनीकी दिखावे से ज्यादा जरूरी है कि देश के संवैधानिक ढांचे को बचाया जाए। उन्होंने देशभर के 'अंबेडकरवादियों' से अपील की कि वे एकजुट होकर बाबा साहेब के आत्म-सम्मान के आंदोलन को धार दें।
'हाथी की मस्त चाल' और 2007 की वापसी का मंत्र
बसपा सुप्रीमो ने अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि उन्हें 'हाथी की मस्त चाल' चलते रहना चाहिए, चाहे विरोधी कुछ भी कहें। उनका लक्ष्य 2007 के विधानसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन दोहराना है, जब बसपा ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता एक बार फिर बसपा के शासनकाल की कानून-व्यवस्था और विकास को याद कर रही है और पार्टी अपने बलबूते पर ही सत्ता में वापसी करेगी।
गेस्ट हाउस कांड का खौफ और बंगले का सच
दिल्ली में टाइप-8 श्रेणी का बड़ा सरकारी बंगला आवंटित होने पर उठ रहे सवालों पर मायावती ने चुप्पी तोड़ी। उन्होंने 2 जून 1995 के उस भयावह 'गेस्ट हाउस कांड' की याद दिलाई, जब लखनऊ में उन पर जानलेवा हमला हुआ था। उन्होंने कहा, "सपा सरकार और उनके मुखिया के इशारे पर उस दिन मेरी जान लेने की कोशिश की गई थी। उसी घटना के बाद से केंद्र सरकार ने मुझे उच्च श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की थी।" मायावती ने स्पष्ट किया कि उनकी जान का खतरा कम होने के बजाय अब और बढ़ गया है, इसलिए सुरक्षा मानकों के तहत ही उन्हें यह बंगला दिया गया है। इसे लेकर भ्रामक प्रचार करने वालों को उन्होंने आड़े हाथों लिया।




