13 लाख मुस्लिम वोटर और भाजपा की बंपर जीत, इस सीट पर हिमंत सरमा ने कैसे रचा ये 'असंभव' चक्रव्यूह
देश भर में आंदोलनों और तीखी बयानबाजी के बीच चुनावी रणभूमि में भारतीय जनता पार्टी का चुनावी गणित एक बार फिर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में संपन्न उपचुनावों के नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा और असम की नगांव लोकसभा सीट पर मिली जीत ने विपक्षी दलों के पारंपरिक वोट बैंक समीकरणों को हिला कर रख दिया है। विशेष रूप से असम की नगांव सीट पर आया नतीजा अभूतपूर्व है, क्योंकि 2023 के परिसीमन के बाद यह सीट स्पष्ट रूप से मुस्लिम-बहुल क्षेत्र में बदल चुकी थी। करीब 13 लाख मुस्लिम और महज 7 लाख हिंदू मतदाताओं वाली इस सीट पर भाजपा की जीत लगभग नामुमकिन मानी जा रही थी, लेकिन पार्टी ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया।
हिमंत बिस्वा सरमा बने जीत के हीरो
इस ऐतिहासिक जीत के मुख्य सूत्रधार असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा रहे, जिन्होंने टिकट वितरण से लेकर जमीनी प्रचार तक पूरी कमान अपने हाथों में रखी थी। भाजपा ने यहां पूर्व आईएएस अधिकारी देवाशीष शर्मा पर दांव लगाया, जो पहले इसी जिले में अपनी प्रशासनिक सेवाएं दे चुके थे। देवाशीष शर्मा ने एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को करीब 1.4 लाख वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार बुरी तरह पिछड़कर तीसरे स्थान पर खिसक गया।
हिमंत सरमा की रणनीति का सबसे अहम पहलू मुस्लिम मतों के विपरीत ध्रुवीकरण को रोकना था। देवाशीष शर्मा ने कमिश्नर रहते हुए सभी समुदायों तक बिना भेदभाव के सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की थी, जिससे स्थानीय स्तर पर उनकी स्वच्छ और विकासवादी छवि बनी। उपचुनाव के दौरान भाजपा ने जानबूझकर अपने प्रचार अभियान को लो-प्रोफाइल रखा ताकि विपक्ष को आक्रामक ध्रुवीकरण का मौका न मिले। इसका नतीजा यह हुआ कि जहां हिंदू मतदाता एकजुट होकर बूथों तक पहुंचे, वहीं बदरुद्दीन अजमल की देर से उम्मीदवारी और बिखरे हुए विपक्ष के चलते अल्पसंख्यक वोट कई धड़ों में बंट गए। स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित इस सुनियोजित रणनीति ने नगांव में भाजपा के लिए एक नया सियासी अध्याय लिख दिया।