किसानों को केंद्र की बड़ी सौगात: फसल नुकसान पर तीस हजार तक राहत, NDRF के नए नियम लागू

किसानों को केंद्र की बड़ी सौगात: फसल नुकसान पर तीस हजार तक राहत, NDRF के नए नियम लागू

प्राकृतिक आपदा, बेमौसम बारिश और सूखे की दोहरी मार से जूझ रहे देश के अन्नदाताओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के तहत दी जाने वाली आर्थिक मदद के मानकों में व्यापक बदलाव किए गए हैं। इस संशोधन के बाद असिंचित, सिंचित और बागवानी फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए प्रति हेक्टेयर मिलने वाली मुआवजा राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी गई है। केंद्र सरकार की ओर से तय किए गए ये संशोधित मानक आगामी पांच वर्षों यानी वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे, जिससे 1 अप्रैल 2026 के बाद प्राकृतिक आपदा का शिकार होने वाले किसानों को सीधा फायदा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

नए नियमों के मुताबिक, असिंचित खेती में नुकसान होने पर मिलने वाला मुआवजा 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तय किया गया है। वहीं सिंचित जमीन पर फसल बर्बाद होने की स्थिति में किसानों को अब 17 हजार की जगह 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की वित्तीय मदद मिलेगी। फल बागानों और हॉर्टिकल्चर को हुए नुकसान पर राहत राशि को 22,500 रुपये से बढ़ाकर सीधे 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है।

आवासीय क्षति के नियमों को भी बदला गया

फसलों के साथ-साथ प्राकृतिक आपदा में जनहानि और आवासीय क्षति के नियमों को भी बदला गया है। आपदा के दौरान जान गंवाने वाले व्यक्ति के आश्रितों को अब 4 लाख रुपये के स्थान पर 8 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पक्के मकान के पूर्ण रूप से ध्वस्त होने पर मिलने वाली सहायता 1.25 लाख से बढ़ाकर 1.60 लाख रुपये और दुर्गम या पहाड़ी इलाकों में यह राशि 1.30 लाख से बढ़ाकर 1.70 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं आंशिक रूप से टूटे मकानों की मरम्मत के लिए मिलने वाली 5 हजार रुपये की मदद को बढ़ाकर 8,500 रुपये किया गया है।

पशुपालकों और कुक्कुट पालकों को भी नए पैकेज में सीधा संबल दिया गया है। गाय, भैंस, घोड़ा या ऊंट जैसे बड़े दुधारू व उपयोगी पशुओं की मौत पर अब 40 हजार के बजाय 50 हजार रुपये का मुआवजा मिलेगा। छोटे मवेशी जैसे बकरी, भेड़ और सूअर के नुकसान पर यह राशि 4 हजार से बढ़ाकर 5,500 रुपये, जबकि गधे और खच्चर जैसे बोझा ढोने वाले पशुओं के लिए 20 हजार से बढ़ाकर 25,400 रुपये कर दी गई है। पोल्ट्री फार्मिंग करने वालों को प्रति मुर्गी (अधिकतम 100 मुर्गियों तक) 100 की जगह 130 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।

इन नए मानकों को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए संबंधित राज्य सरकारों की कैबिनेट मंजूरी जरूरी होगी। उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र में हालिया अतिवृष्टि और सूखे को लेकर राज्य सरकार ने पहले केंद्र को 31 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अब मानकों में संशोधन के बाद राज्य को अपनी कार्ययोजना और बजट प्रस्ताव नए सिरे से तैयार कर भेजने होंगे। माना जा रहा है कि राज्य मंत्रिमंडल की हरी झंडी मिलते ही प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के खातों में संशोधित दरों पर राहत राशि जारी होना शुरू हो जाएगी।