राष्ट्रपति के बाद अब ओम बिरला के पास पहुंचीं BJP की कई महिला सांसद
भारतीय संसद का गलियारा इन दिनों तीखे राजनीतिक टकराव, बयानबाजी और हाई-प्रोफाइल ड्रामे का मुख्य केंद्र बना हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही तनातनी अब केवल राजनीतिक बहसों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह संसद की मर्यादा और व्यक्तिगत गरिमा के स्तर तक पहुंच चुकी है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में सांसद राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक विवादित बयान और सदन के भीतर उनके आचरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला सांसदों ने बेहद आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। अपने विरोध को और अधिक मुखर करते हुए बीजेपी की तमाम महिला सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल पहले देश की महामहिम राष्ट्रपति से गुहार लगा चुका है, और अब उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला से मुलाकात कर एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। महिला सांसदों की मांग है कि संसदीय मर्यादाओं को तार-तार करने वाले इस आचरण के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
क्या है पूरा मामला और क्यों भड़की हैं बीजेपी की महिला सांसद?
संसद सत्र के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोक अक्सर देखने को मिलती है, लेकिन इस बार का विवाद संसद के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर महिला गरिमा और शिष्टाचार के मुद्दों पर आकर टिक गया है। बीजेपी की महिला सांसदों का आरोप है कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सदन के पटल पर और उसके बाहर जिस प्रकार की भाषा शैली और शारीरिक हाव-भाव (Body Language) का प्रदर्शन किया, वह न केवल संसदीय लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि देश की आधी आबादी यानी महिलाओं का भी अपमान है। महिला सांसदों का कहना है कि राजनीति में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी भी नेता को इस बात की छूट नहीं मिल सकती कि वह सदन की मर्यादा को ताक पर रखकर अमर्यादित आचरण करे। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर बीजेपी की महिला नेताओं ने एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और वे लगातार शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा रही हैं।
राष्ट्रपति के बाद अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के दरबार में पहुंचीं महिला सांसद
अपनी मांग को पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ाते हुए, बीजेपी की महिला सांसदों ने सबसे पहले राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उन्होंने संसद में महिला जनप्रतिनिधियों के साथ हो रहे कथित अपमान और अमर्यादित टिप्पणियों के खिलाफ हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इसी कड़ी में अब महिला सांसदों का प्रतिनिधिमंडल लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला के आधिकारिक आवास और कार्यालय पहुंचा। सांसदों ने स्पीकर के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष होने के नाते सदन की सर्वोच्च गरिमा को बचाना उनकी मुख्य जिम्मेदारी है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि वीडियो फुटेज और सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड की जांच कर राहुल गांधी के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सदन के अंदर शालीनता और अनुशासन का माहौल बरकरार रखा जा सके।
कांग्रेस और विपक्ष का पलटवार: 'मुद्दों से ध्यान भटकाने की हो रही है राजनीति'
दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दलों ने बीजेपी की इस पूरी मुहिम को एक सुनियोजित राजनीतिक प्रोपेगंडा और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश करार दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार देश की गंभीर समस्याओं जैसे महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दों और अन्य राष्ट्रीय संकटों पर घिर चुकी है, और उन्हीं विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के कृत्रिम विवाद खड़े किए जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि राहुल गांधी हमेशा से जनहित के मुद्दों को पूरी बेबाकी के साथ उठाते आए हैं, जिससे सत्ता पक्ष घबराया हुआ है। विपक्षी खेमे का यह भी कहना है कि बीजेपी जानबूझकर महिला सुरक्षा और गरिमा के भावनात्मक मुद्दों को आगे करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रही है, जिसे देश की जनता और जागरूक मतदाता भली-भांति समझ रहे हैं।
संसद के आगामी सत्रों पर पड़ेगा गहरा असर, गतिरोध थमने के आसार नहीं
इस हाई-प्रोफाइल विवाद और महिला सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष की गई औपचारिक शिकायत के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही बेहद हंगामेदार रहने वाली है। जब तक इस मामले पर कोई ठोस निर्णय या प्रशासनिक रुख सामने नहीं आता, तब तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह शीत युद्ध थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ जहां बीजेपी इसे महिला सम्मान और संसदीय मर्यादा की लड़ाई बता रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे दमनकारी और तानाशाही रवैया करार दे रहा है। भारतीय लोकतंत्र के मंदिर में चल रही इस राजनीतिक खींचतान के बीच आम जनता की निगाहें अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील मामले में क्या और कैसी कार्रवाई करते हैं।