प्रदर्शन की वजह से खान मार्केट में रोज 50 करोड़ का स्वाहा: दुकानों का किराया 3 लाख, कमाई शून्य
राजधानी दिल्ली के प्रमुख कारोबारी केंद्रों कनॉट प्लेस और खान मार्केट में निरंतर हो रहे सियासी विरोध प्रदर्शनों और जगह-जगह लगी पुलिस बैरिकेडिंग ने दुकानदारों की कमर तोड़ दी है। फेस्टिव सीजन के चरम पर बाजारों के रास्ते बंद होने और सुरक्षा पाबंदियों के चलते खरीदार बाजारों का रुख करने से कतरा रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अकेले खान मार्केट एसोसिएशन ने रोजाना करीब 50 करोड़ रुपये के सीधे कारोबारी नुकसान का दावा किया है। व्यापारियों का कहना है कि खान मार्केट में प्रति दुकान का दैनिक किराया ही लगभग 3 लाख रुपये तक बैठता है, ऐसे में बिक्री शून्य होने पर किराया, कर्मचारियों का वेतन और मेंटेनेंस निकालना नामुमकिन हो गया है। अपनी आजीविका पर गहराते संकट को देखते हुए व्यापारियों ने अब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय और देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाया है।
कनॉट प्लेस के हालात भी इससे जुदा नहीं हैं। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) के अध्यक्ष अतुल भार्गव के अनुसार, बीते एक हफ्ते से जारी धरनों और पाबंदियों के चलते कनॉट प्लेस का व्यापार गिरकर सामान्य दिनों के महज 10 फीसदी पर सिमट गया है। पहले सीजेपी और उसके बाद विपक्षी गठबंधन के प्रदर्शनों ने फेस्टिव रिकवरी की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का फेस्टिव व वेडिंग सीजन पूरे साल की कमाई की रीढ़ होता है। इसके लिए दुकानदारों ने लाखों-करोड़ों का एडवांस स्टॉक भर रखा है, लेकिन रास्तों की नाकेबंदी ने ग्राहकों की आवाजाही पर ब्रेक लगा दिया है।
गौरतलब है कि कनॉट प्लेस के इनर, मिडिल और आउटर सर्कल में लगभग 1400 दुकानें, दफ्तर और रेस्टोरेंट संचालित होते हैं। इसके साथ ही करीब 300 अंडरग्राउंड दुकानों वाले पालिका बाजार और 200 दुकानों वाले शंकर मार्केट में भी लगभग 2000 कारोबारी इकाइयां इस संकट से सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं। आगामी 16 और 17 तारीख को सेंट्रल पार्क के बंद रहने और नए प्रदर्शनों की आशंका के कारण कारोबार 25 फीसदी तक और नीचे गिरने का डर सता रहा है।
संकट से जूझ रहे व्यापारी संगठनों ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, उपराज्यपाल (LG) और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। व्यापारियों ने दो टूक मांग रखी है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर या रामलीला मैदान जैसी तय जगहों का ही सख्ती से इस्तेमाल किया जाए। व्यावसायिक केंद्रों में बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन से आम जनता की आवाजाही, एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं और व्यापारियों का करोड़ों का धंधा किसी भी कीमत पर बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए।