धनबाद के सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट फिर ठप: 5 जिलों के मरीजों की सांसें अटकीं, मई में 2 मौतों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
झारखंड के दूसरे सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान, शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) धनबाद में एक बार फिर गंभीर ऑक्सीजन संकट खड़ा हो गया है। अस्पताल के प्रेशर स्विंग एडजॉर्पशन (PSA) ऑक्सीजन प्लांट का मुख्य कंप्रेसर तकनीकी खराबी के चलते पूरी तरह बैठ गया है। इसके चलते सेंट्रल पाइपलाइन के जरिए आईसीयू, इमरजेंसी, ऑपरेशन थियेटर और विभिन्न वार्डों में जाने वाली निर्बाध ऑक्सीजन आपूर्ति ठप पड़ गई है। इस बदहाली ने न सिर्फ धनबाद, बल्कि गिरिडीह, बोकारो, देवघर और जामताड़ा जैसे पड़ोसी जिलों से जिंदगी की आस लेकर पहुंचे सैकड़ों गंभीर मरीजों की सांसों पर संकट खड़ा कर दिया है।
वर्तमान में 560 से 900 बेड की क्षमता वाले इस प्रमुख रेफरल अस्पताल में रोजाना हजारों लोग ओपीडी और इनडोर सेवाओं के लिए पहुंचते हैं। प्लांट ठप होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने नोटिस चस्पा कर औपचारिकता तो निभा दी, लेकिन स्थायी समाधान कब तक होगा, इसका कोई स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं है। फिलहाल पूरा अस्पताल सिलिंडरों के नाजुक सहारे पर टिका हुआ है। गुरुवार को आपात स्थिति से निपटने के लिए 40 जंबो ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाए गए, जबकि पीडियाट्रिक (शिशु रोग) विभाग को 18 बी-टाइप सिलिंडर दिए गए। सिलिंडर आधारित व्यवस्था में लगातार मॉनिटरिंग, ट्रांसपोर्टेशन और रिफिलिंग की दरकार होती है; ऐसे में थोड़ी सी भी चूक या देरी वेंटिलेटर पर जिंदगी से जंग लड़ रहे मासूमों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
यह व्यवस्थागत लापरवाही इसलिए भी रूह कंपाने वाली है क्योंकि इसी साल मई महीने में भी प्लांट चार दिनों तक लगातार बंद रहा था, जिसके दौरान ऑक्सीजन की किल्लत से दो मरीजों ने दम तोड़ दिया था। उस वक्त पटना से आई तकनीकी टीम ने आनन-फानन में खराबी दुरुस्त की थी, लेकिन स्थायी समाधान को ताक पर रख दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि 1000 एलपीएम और 600 एलपीएम क्षमता वाले पीएसए प्लांट की मरम्मत का टेंडर बीते महीनों में चार बार रद्द हो चुका है। पहले से खामियों की जानकारी होने के बावजूद स्वास्थ्य महकमे और अस्पताल प्रशासन की यह ढिलाई अब गरीब मरीजों पर भारी पड़ रही है।
दूरदराज के इलाकों से पहुंचे तीमारदारों का कहना है कि ऑक्सीजन बेड और वेंटिलेटर सपोर्ट न मिलने के कारण डॉक्टरों द्वारा मरीजों को आनन-फानन में दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। गरीब परिवारों के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे संवेदनशील वक्त में जरूरत इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग महज टेंडरों की कागजी प्रक्रिया में उलझने के बजाय नए कंप्रेसर की तत्काल स्थापना की समय-सीमा तय करे और वार्डों में बैकअप सिलिंडरों का पुख्ता स्टॉक सुनिश्चित करे।