आम आदमी की जेब पर एक और वार, अब महंगी हो सकती है बिजली
बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी के घरेलू बजट पर एक और मार पड़ने जा रही है। तेलंगाना इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (TGERC) द्वारा बिजली लागत से जुड़े बहुप्रतीक्षित ट्रू-अप चार्ज को हरी झंडी दिए जाने के बाद बिजली बिलों में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले ने न केवल स्थानीय उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं, बल्कि पूरे देश में बिजली की दरों, बढ़ती खपत और आम परिवारों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में मासिक बिजली खपत लगातार 160 से 169 अरब यूनिट के उच्च स्तर पर बनी हुई है। अकेले अगस्त के महीने में देश भर में कुल 169.01 अरब यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई, जो पिछले साल की समान अवधि में दर्ज 149.76 अरब यूनिट के मुकाबले 12.85 फीसदी अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान उमस और गर्मी बढ़ने के चलते घरों व दफ्तरों में एयर कंडीशनर (AC) और कूलिंग उपकरणों का भारी इस्तेमाल हुआ, जिसके चलते बिजली की पीक डिमांड 229.72 गीगावाट से छलांग लगाकर 258.27 गीगावाट तक पहुंच गई। हालांकि यह स्तर मई में बने 270.82 गीगावाट के रिकॉर्ड से नीचे ही रहा।
पूरे देश के लिए कोई एक समान बिजली बिल तय नहीं होता, क्योंकि प्रत्येक राज्य की विद्युत नियामक संस्थाएं अपने हिसाब से स्लैब और सब्सिडी तय करती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर औसतन घरेलू बिजली की दर लगभग 6.86 रुपये प्रति यूनिट बैठती है, जबकि व्यावसायिक यानी कमर्शियल इस्तेमाल के लिए यह आंकड़ा करीब 10.28 रुपये प्रति यूनिट रहता है। इसके चलते एक सामान्य भारतीय परिवार का मासिक बिजली बिल सामान्यतः 500 रुपये से लेकर 2,500 रुपये के दायरे में आता है, जो उपकरणों की संख्या और स्थानीय राज्य टैरिफ पर निर्भर करता है। अब ट्रू-अप चार्ज जैसे अतिरिक्त शुल्कों की मंजूरी से उपभोक्ताओं की मासिक जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।