सावधान...अब मेडिकल स्टोर से सीधे नहीं खरीद पाएंगे कफ सीरप: मोदी सरकार का देशव्यापी सख्त आदेश

सावधान...अब मेडिकल स्टोर से सीधे नहीं खरीद पाएंगे कफ सीरप: मोदी सरकार का देशव्यापी सख्त आदेश

यदि आप भी मामूली सर्दी-खांसी या गले में खराश होने पर सीधे मेडिकल स्टोर जाकर अपनी मर्जी से कोई भी कफ सीरप खरीद लेते थे, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। केंद्र सरकार ने देश में सीरप आधारित दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग और नशे की लत पर लगाम लगाने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने मंगलवार को एक नया देशव्यापी आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके तहत अब कफ सीरप सहित सभी सीरप वाली लिक्विड दवाओं को बिना डॉक्टर की वैध पर्ची (Doctor's Prescription) के खुले बाजार में बेचना पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है। लाइव हिन्दुस्तान की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड विशेष खोजी स्वास्थ्य और फार्मास्युटिकल रिपोर्ट में विस्तार से जानिए सरकार के इस नए नियम के लागू होने के बाद आपकी रोजमर्रा की जिंदगी और मेडिकल स्टोर्स पर क्या असर पड़ने वाला है।

ड्रग्स रूल्स 1945 में हुआ ऐतिहासिक संशोधन, 9 जून को केंद्र सरकार ने जारी किया ऑफिशियल गजट

यह क्रांतिकारी बदलाव केंद्र सरकार द्वारा भारत के दशकों पुराने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में 'ड्रग्स (पांचवां संशोधन) रूल्स, 2026' के जरिए किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस नए कानून को पूरी तरह अंतिम रूप देते हुए 9 जून 2026 को ही देश के ऑफिशियल गजट (राजपत्र) में नोटिफाई कर दिया था, जिसे अब पूरे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तत्काल प्रभाव से कड़ाई से लागू करने का आदेश दे दिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब देश का कोई भी फार्मासिस्ट या केमिस्ट किसी भी ग्राहक को बिना पर्चा देखे कफ सीरप या कोई भी अन्य मेडिकल सीरप नहीं दे सकेगा और ऐसा करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जानिए क्या है वो शेड्यूल 'K' जिससे केंद्र सरकार ने हटाया 'सीरप' शब्द, अब नियमों के दायरे में होंगी दवाएं

अगर तकनीकी और कानूनी नजरिए से समझें तो इस नए संशोधन के तहत 'ड्रग्स रूल्स, 1945' की अत्यंत महत्वपूर्ण अनुसूची K (Schedule K) के सीरियल नंबर 13 के आइटम नंबर (7) में से 'सीरप' (Syrups) शब्द को हमेशा के लिए डिलीट यानी हटा दिया गया है। दरअसल, अब तक इस अनुसूची 'K' में उन दवाओं की खास कैटेगरीज को शामिल किया गया था, जिन्हें कुछ विशेष शर्तों के साथ 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' के चैप्टर IV के कड़े रेगुलेटरी प्रावधानों से विशेष छूट मिली हुई थी, जिसके कारण ये बाजार में ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक रही थीं। लेकिन अब इस लिस्ट से सीरप शब्द के हटते ही सभी प्रकार की सिरप दवाएं सीधे सख्त विनियामक और नियामक आवश्यकताओं (Strict Regulatory Requirements) के पूर्ण दायरे में आ गई हैं।

आम जनता और हेल्थ एक्सपर्ट्स के सुझावों पर हुआ फैसला, ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की मिली हरी झंडी

स्वास्थ्य मंत्रालय का यह अंतिम आदेश कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। इससे पहले सरकार ने 29 दिसंबर, 2025 को एक व्यापक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर फार्मा उद्योग के स्टेकहोल्डर्स, डॉक्टरों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और देश की आम जनता से इस कानून को लेकर आपत्तियां, फीडबैक और रचनात्मक सुझाव मांगे थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फाइनल नोटिफिकेशन जारी करने से पहले इस ड्राफ्ट पर देश भर से मिलीं सभी महत्वपूर्ण टिप्पणियों और सुरक्षा चिंताओं पर गहराई से विचार-विमर्श किया गया। नोटिफिकेशन के मुताबिक, 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' की धारा 12 और 33 के तहत मिलीं सर्वोच्च शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार ने 'ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड' (DTAB) से गहन सलाह-मशविरा करने के बाद ही इस सुरक्षा कानून को पास किया है, ताकि बच्चों और वयस्कों में सीरप दवाओं के ओवरडोज और गलत इस्तेमाल को रोका जा सके।

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