जंतर-मंतर प्रदर्शन में बड़ी साजिश? टेलीग्राम नेटवर्क, वॉट्सऐप चैनल और QR कोड से चल रहा था 'गुप्त ऑपरेशन'
दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर इस समय देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों का गवाह बना हुआ है। लेकिन इस प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया विभागों (Intelligence Bureau) की ताजा रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, छात्रों के इस आंदोलन के पीछे एक बेहद सुनियोजित और बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश के तार जुड़ते दिख रहे हैं। जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन को हवा देने और भीड़ जुटाने के लिए आम तरीकों का नहीं, बल्कि टेलीग्राम नेटवर्क, वॉट्सऐप चैनल्स और सीक्रेट QR कोड रजिस्ट्रेशन जैसी आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस पूरे 'गुप्त ऑपरेशन' का पर्दाफाश करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है।
टेलीग्राम के 'डार्क ग्रुप्स': कोडवर्ड में हो रही थी बातचीत
खुफिया एजेंसियों की तकनीकी विंग ने जब प्रदर्शन से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट्स को खंगाला, तो टेलीग्राम पर बने कई ऐसे ग्रुप्स का पता चला जो बेहद गोपनीय तरीके से संचालित हो रहे थे। इन ग्रुप्स में शामिल सदस्यों को सीधे तौर पर कोई निर्देश नहीं दिए जा रहे थे, बल्कि कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। किस दिन, किस समय और जंतर-मंतर के किस कोने पर कितनी भीड़ जुटानी है, इसकी पूरी मैपिंग इन टेलीग्राम चैनल्स पर साझा की जा रही थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन ग्रुप्स के एडमिन और ऑपरेटरों के आईपी एड्रेस (IP Address) भारत के बाहर के भी पाए गए हैं, जिससे विदेशी साजिश का शक और गहरा गया है।
वॉट्सऐप चैनल और QR कोड: ऐसे फैलाया गया जाल
प्रदर्शनकारियों को लामबंद करने के लिए वॉट्सऐप के नए 'चैनल' फीचर का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इन चैनल्स के जरिए भड़काऊ संदेश, एडिटेड वीडियो और भ्रामक आंकड़े शेयर करके युवाओं की भावनाओं को भड़काया जा रहा था। इतना ही नहीं, जंतर-मंतर पर आने वाले नए छात्रों को जोड़ने के लिए एक 'सीक्रेट QR कोड रजिस्ट्रेशन' सिस्टम तैयार किया गया था। इस QR कोड को स्कैन करते ही छात्र एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बन जाते थे, जहां उन्हें प्रदर्शन के दौरान पुलिसिया कार्रवाई से बचने और बैरिकेड्स तोड़ने के तरीके सिखाए जा रहे थे। यह पूरी प्लानिंग किसी आम छात्र संगठन के बस की बात नहीं लगती, बल्कि इसके पीछे किसी प्रोफेशनल टूलकिट (Toolkit) के होने की आशंका है।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट: फंडिंग और मास्टरमाइंड की तलाश तेज
इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं। जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। साइबर सेल की टीमें इन सभी संदिग्ध टेलीग्राम ग्रुप्स और वॉट्सऐप चैनल्स को ट्रैक करने में जुट गई हैं। जांच का मुख्य केंद्र अब इस बात पर है कि इस पूरे डिजिटल नेटवर्क को चलाने के लिए फंडिंग (पैसा) कहां से आ रही है और पर्दे के पीछे बैठा असली मास्टरमाइंड कौन है। प्रशासन का कहना है कि जायज मांगों के लिए प्रदर्शन करना छात्रों का अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में देश की कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाली किसी भी डिजिटल साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।