राज्यसभा चुनाव के लिए BJP ने उतारे दो और उम्मीदवार: उत्तराखंड से दिनेश आर्य और बंगाल से कोयल मल्लिक पर लगाया दांव, देखें पूरा शेड्यूल
आगामी राज्यसभा चुनाव और उपचुनावों को लेकर BJP ने अपनी चुनावी बिसात बिछाते हुए दो और महत्वपूर्ण सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने देवभूमि उत्तराखंड की रिक्त हो रही सीट के लिए दिनेश आर्य के नाम पर मुहर लगाई है, जबकि पश्चिम बंगाल की एकल रिक्त सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए रुक्मिणी मल्लिक उर्फ कोयल मल्लिक को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। संगठन की इस घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों के सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल की जिस सीट पर उपचुनाव हो रहा है, वह रुक्मिणी मल्लिक के बीती 16 जुलाई को दिए गए इस्तीफे के चलते खाली हुई थी। उनका मूल कार्यकाल दो अप्रैल 2032 तक निर्धारित था। राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो रुक्मिणी मल्लिक पूर्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़ी हुई थीं, लेकिन सांसदों के अंतर्कलह और बगावत के दौर में उन्होंने ममता बनर्जी की पार्टी से किनारा कर भाजपा का दामन थाम लिया था। अब भगवा दल ने उन पर दोबारा भरोसा जताते हुए उसी सीट से राज्यसभा भेजने का फैसला किया है।
संसदीय समीकरणों की बात करें तो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल को मिलाकर कुल 12 राज्यसभा सीटों पर चुनावी प्रक्रिया संपन्न होनी है। उत्तर प्रदेश से संसद के उच्च सदन में प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, नीरज शेखर, बृजलाल, बी.एल. वर्मा, सीमा, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, रामजी और सपा के प्रो. राम गोपाल यादव का छह वर्षीय कार्यकाल आगामी 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। इसके साथ ही पूर्व उप-मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के 11 सितंबर को इस्तीफे के कारण रिक्त हुई सीट भी इसमें शामिल है। वहीं उत्तराखंड से भाजपा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल भी 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है, जिनकी जगह पार्टी ने दिनेश आर्य को चुनावी मैदान में उतारा है।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक चुनावी कार्यक्रम के अनुसार, इन सभी 12 सीटों के लिए अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग के तय शेड्यूल के मुताबिक 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान संपन्न कराया जाएगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतों की गिनती कर परिणामों की घोषणा की जाएगी। चुनाव आयोग ने अधिकारियों को पूरी चुनावी और वैधानिक प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से संपन्न कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।