भारतीय जनसंघ के 75वें स्थापना दिवस पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कही बड़ी बात
भारतीय राजनीति के इतिहास में 21 अक्टूबर का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और मील का पत्थर माना जाता है। इसी पावन तिथि को देश के महान राष्ट्रभक्त डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी, जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के तौर पर स्थापित हुआ। इस वर्ष भारतीय जनसंघ के 75वें स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भावुक और ओजस्वी विचार व्यक्त किए। नितिन नवीन ने कहा, "यह मेरा परम सौभाग्य है कि जनसंघ के इस 75वें स्थापना दिवस के ऐतिहासिक क्षण में मुझे अपनी पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं और भारत माता के प्रति समर्पित विचारों से रूबरू होने का सुअवसर प्राप्त हुआ है।" उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि 1951 में बोया गया एक छोटा सा वैचारिक बीज आज एक वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है, जो 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ भारत को 'विश्वगुरु' बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि जनसंघ के इस हीरक जयंती अवसर पर भाजपा अध्यक्ष ने कौन-सी बड़ी बातें कही हैं और इस विचार का ऐतिहासिक सफर कैसा रहा है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के त्याग और बलिदान का पुण्य स्मरण
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि भारतीय जनसंघ की स्थापना किसी सत्ता या राजनीतिक पद की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि भारत की महान सांस्कृतिक विरासत, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए की गई थी। उन्होंने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नमन करते हुए कहा कि एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान के खिलाफ उनका अमर बलिदान आज भी हर भारतीय कार्यकर्ता के दिल में देशभक्ति की लौ जलाता है। इसके साथ ही उन्होंने 'एकात्म मानववाद' के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांतों को याद किया और कहा कि अंत्योदय यानी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और सम्मान पहुंचाना ही जनसंघ से लेकर भाजपा तक की सर्वोच्च कार्यपद्धति रही है। नितिन नवीन ने कहा कि हमारे पुरोधाओं ने देश की एकता और अखंडता के लिए जो तपस्या, त्याग और कठोर तप किया था, उसी के आधारशिला पर आज का सक्षम और सामर्थ्यवान भारत खड़ा हुआ है।
1951 के जनसंघ से लेकर वर्तमान भाजपा तक का संघातिक एवं प्रेरणादायी सफर
1951 में स्थापित हुए भारतीय जनसंघ का सफर भारतीय लोकतंत्र का सबसे प्रेरणादायी और ऐतिहासिक अध्याय है। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र को बचाने के लिए जनसंघ के नेताओं ने अपने अस्तित्व को न्योछावर करते हुए जनता पार्टी में विलय का साहसी निर्णय लिया था। इसके बाद जब वैचारिक मतभेदों के कारण स्थितियां बदलीं, तो 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ। संसद में केवल दो सीटों से अपनी यात्रा शुरू करने वाली इस विचारधारा ने भारत की जनता के अपार विश्वास और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के अदम्य परिश्रम के बल पर केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह वैचारिक यात्रा अपने स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुकी है। धारा 370 के उन्मूलन से लेकर अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण तक, जनसंघ के समय लिया गया हर एक संकल्प आज सिद्ध हो चुका है।
2047 के विकसित भारत के निर्माण में कार्यकर्ताओं से आह्वान और भविष्य की दिशा
जनसंघ के 75वें स्थापना दिवस के इस विशेष मंच से नितिन नवीन ने देश भर के करोड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक नया संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि 75 वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा हमें केवल अतीत पर गर्व करने का अवसर नहीं देती, बल्कि आने वाले भविष्य के लिए एक भारी जिम्मेदारी का बोध भी कराती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के महान विजन को साकार करने के लिए पार्टी के हर एक कार्यकर्ता को पूरी निष्ठा के साथ जनता के बीच जाकर सेवा कार्य करने होंगे। उन्होंने युवाओं और महिलाओं की राजनीति में बढ़ती भागीदारी को देश के लिए शुभ संकेत बताया और कहा कि भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि यह देश के पुनर्निर्माण का एक सांस्कृतिक एवं जन-आंदोलन है। इस अवसर पर देश भर के विभिन्न राज्यों और जिला मुख्यालयों में दीप प्रज्वलन, संगोष्ठियों और विचार मंचों का आयोजन किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने जनसंघ की राष्ट्रवादी नीतियों पर चलने का पुनः संकल्प लिया।