संसद में 2/3 बहुमत के लिए BJP का 'मास्टरस्ट्रोक': महाराष्ट्र में NCP के दोनों गुटों को NDA में साथ लाने का महा-प्लान
महाराष्ट्र और देश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी सियासी खबर सामने आ रही है। संसद के आगामी मॉनसून सत्र में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने वाले ऐतिहासिक संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को पारित कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बेहद चौंकाने वाली व्यूहरचना तैयार की है। संसद में दो-तिहाई (2/3) विशेष बहुमत का जादुई आंकड़ा जुटाने के लिए बीजेपी अब महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों धड़ों (शरद पवार गुट और सुनेत्रा पवार गुट) को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के छत्र तले एक साथ लाने के महा-प्लान पर काम कर रही है।
पहले होगा दोनों गुटों का विलय, फिर NDA में मिलेगी एंट्री
राजनीतिक गलियारों और शीर्ष सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने शरद पवार गुट की एनडीए में एंट्री को लेकर एक बेहद सख्त और स्पष्ट शर्त रखी है। बीजेपी किसी एक गुट या कुछ चुनिंदा नेताओं को अलग से गठबंधन में शामिल कर भविष्य का जोखिम नहीं लेना चाहती। बीजेपी का साफ इन-प्रिंसिपल स्टैंड है कि शरद पवार की NCP (SP) और सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली NCP पहले अपने सभी वैचारिक व व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर पूरी तरह से एक हो जाएं (विलय कर लें), उसके बाद ही इस संयुक्त पार्टी का एनडीए में आधिकारिक स्वागत किया जाएगा।
दिल्ली में 2/3 विशेष बहुमत और 'परिसीमन' का बड़ा गणित
बीजेपी इस समय देश में दूरगामी संवैधानिक सुधारों और नए परिसीमन को लागू करने की तैयारी में है, जिसके लिए उसे संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की सख्त जरूरत है। वर्तमान में लोकसभा में शरद पवार की पार्टी NCP (SP) के पास 8 मजबूत सांसद हैं। अगर महाराष्ट्र के ये दोनों गुट एक होकर एनडीए के पाले में आ जाते हैं या इस बड़े विधेयक पर सरकार के पक्ष में मतदान करते हैं, तो मोदी सरकार के लिए संसद में इस ऐतिहासिक 131वें संशोधन विधेयक को बिना किसी अड़चन के पास कराना बेहद आसान हो जाएगा।
सुप्रिया सुले के बयान ने राजनीतिक हलचल को दी हवा
इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले के एक हालिया बयान ने अटकलों के बाजार को पूरी तरह गर्म कर दिया है। सुप्रिया सुले ने कहा था कि यदि प्रस्तावित परिसीमन के तहत देश के सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में समान रूप से 50% की वृद्धि की जाती है, तो इसका विरोध करने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे कोई भी अंतिम फैसला 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के सहयोगियों से चर्चा के बाद ही लेंगी और एनडीए में जाने की खबरों को फिलहाल मीडिया की अटकलबाजी बताया।
स्थानीय निकाय चुनावों का झटका और अंदरूनी मजबूरी
इस बड़े सियासी यू-टर्न के पीछे जमीनी हकीकत और स्थानीय निकाय (महानगरपालिका) चुनावों के नतीजे भी एक बड़ी वजह माने जा रहे हैं। पिंपरी-चिंचवड जैसी मजबूत जगहों पर भी राकांपा के दोनों गुट अलग-अलग लड़ने के कारण शिकस्त का सामना कर चुके हैं। इस चुनावी झटके के बाद से ही दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं और जमीनी कैडर में यह बात घर कर गई है कि अलग रहकर दोनों का वजूद खतरे में पड़ रहा है। यही वजह है कि वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई गोपनीय बैठकों के बाद से ही दोनों धड़ों को फिर से एक मंच पर लाकर महाराष्ट्र की पूरी राजनीतिक स्क्रिप्ट को दोबारा लिखने की तैयारी तेज हो गई है।