LAC पर चीन की बढ़ेगी टेंशन- बेल्जियम ने भारत को दिया 42 डिग्री पर आग उगलने वाले खतरनाक टैंक टरेट का ऑफर
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ जारी गतिरोध और हिमालय की दुर्गम चोटियों पर सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय सेना की पर्वतीय युद्ध क्षमता (Mountain Warfare) को और अधिक घातक बनाने के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव सामने आया है। यूरोपीय देश बेल्जियम की प्रतिष्ठित रक्षा निर्माता कंपनी 'जॉन कॉकरिल' ने भारत के सामने अपनी बेहद आधुनिक 105 मिमी टैंक टरेट (105mm Tank Turret) प्रणाली बेचने की पेशकश की है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस उन्नत तकनीक के भारतीय सेना में शामिल होने से लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की मारक क्षमता अभूतपूर्व रूप से मजबूत हो जाएगी, जिससे पड़ोसी देश चीन की रणनीतिक चिंताएं बढ़ना तय है।
क्या होता है टैंक टरेट और क्यों पहाड़ी जंग में गेमचेंजर है बेल्जियम का यह ऑफर
एक आम समझ के लिए बता दें कि टरेट (Turret) किसी भी बख्तरबंद वाहन या टैंक का वह ऊपरी और सबसे मुख्य हिस्सा होता है, जिसके भीतर मुख्य तोप, आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम और अन्य घातक हथियार फिट होते हैं। यह हिस्सा मैदान पर 360 डिग्री घूमकर किसी भी दिशा में निशाना साधने में सक्षम होता है। बेल्जियम की कंपनी ने भारत को पूरा टैंक नहीं, बल्कि अपना बहुपयोगी टरेट सिस्टम ऑफर किया है, जिसे भारतीय सेना अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग हल्के बख्तरबंद वाहनों या स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर आसानी से असेंबल कर सकती है। हिमालय की दुर्गम और संकरी घाटियों में जहां भारी-भरकम टैंकों को ले जाना मुश्किल होता है, वहां यह लाइटवेट सिस्टम बेहद कारगर साबित होगा।
42 डिग्री एलीवेशन की अद्भुत मारक क्षमता, चोटियों पर छिपे दुश्मन का काल बनेगा यह हथियार
इस बेल्जियम टरेट की सबसे क्रांतिकारी विशेषता इसकी तोप का 42 डिग्री की अधिकतम ऊंचाई (High Elevation) तक उठकर फायर करने की क्षमता है। मैदानी इलाकों में चलने वाले पारंपरिक टैंकों की तोपें एक सीमित कोण तक ही ऊपर उठ पाती हैं, जिससे वे पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर बंकर बनाकर बैठे दुश्मनों को निशाना नहीं बना पातीं। लेकिन 42 डिग्री के झुकाव के साथ यह तोप हिमालय की सबसे ऊंची खड़ी ढलानों और चोटियों पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को बेहद सटीकता से सीधे टारगेट कर उन्हें पल भर में नेस्तनाबूद कर सकती है। यही कारण है कि इसे विशेष रूप से पर्वतीय युद्धक्षेत्र को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
ऑटोमैटिक लोडर और हाई-टेक फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस है यह डिफेंस तकनीक
जॉन कॉकरिल के इस 105 मिमी टरेट सिस्टम में अत्याधुनिक 'ऑटोमैटिक लोडर' तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। आम तौर पर पुराने टैंकों में गोला-बारूद लोड करने के लिए एक अलग सैनिक (क्रू मेंबर) की आवश्यकता होती है, जिससे समय अधिक लगता है। इसके विपरीत, ऑटोमैटिक लोडर की वजह से फायरिंग की रफ्तार काफी तेज हो जाती है और सीमित जगह वाले हल्के टैंकों के भीतर सैनिकों की संख्या भी कम रखनी पड़ती है। इसके अलावा इसमें लगा आधुनिक डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम शून्य से कई डिग्री नीचे के तापमान और घने कोहरे जैसी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी चूक रहित निशाना लगाने में मदद करता है।
लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना की सैन्य जरूरतों के लिए बिल्कुल फिट
लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं पर चीन की आक्रामक तैनाती को देखते हुए भारतीय सेना लंबे समय से एक ऐसे लाइटवेट और आक्रामक सैन्य प्लेटफॉर्म की तलाश में है जो वजन में हल्का हो, जिसे वायुसेना के विमानों से तुरंत एयरलिफ्ट किया जा सके और जो पहाड़ों पर तेजी से आगे बढ़ सके। बेल्जियम का यह 105 मिमी टरेट प्रस्ताव भारतीय सेना की इसी जरूरत को पूरा करता दिख रहा है। हालांकि, इस रक्षा सौदे और तकनीक को सेना में शामिल करने का अंतिम फैसला भारतीय रक्षा मंत्रालय और सैन्य अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले कड़े फील्ड ट्रायल और परीक्षणों के बाद ही लिया जाएगा।
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