भारतीय जवानों की तलाशी लेते चीनी सैनिक... पाकिस्‍तान सोशल मीडिया पर फैला रहा था ये झूठ, ऐसी खुली पोल

भारतीय जवानों की तलाशी लेते चीनी सैनिक... पाकिस्‍तान सोशल मीडिया पर फैला रहा था ये झूठ, ऐसी खुली पोल

सोशल मीडिया के इस आधुनिक दौर में जहां सूचनाएं पलक झपकते ही पूरी दुनिया में फैल जाती हैं, वहीं फर्जी खबरों और मनगढ़ंत वीडियो के जरिए भ्रम फैलाने का गंदा खेल भी धड़ल्ले से चल रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा तंत्र और वहां के कई फर्जी सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा एक वीडियो तेजी से वायरल किया जाने लगा। इस वीडियो में यह दावा किया जा रहा था कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय सेना के जवानों की तलाशी ले रहे हैं। इस फर्जी दावे के सामने आते ही भारतीय रक्षा विशेषज्ञों, स्वतंत्र फैक्ट-चेकर्स और सुरक्षा एजेंसियों ने जब इस वीडियो की गहराई से पड़ताल की, तो पाकिस्तान के इस नापाक झूठ का गुब्बारा फुस्स हो गया और दुनिया के सामने उसकी घटिया चालबाजी की कलई पूरी तरह से खुल गई।

पाकिस्तान की डर्टी ट्रिक्स: एडिटेड और फेक वीडियो के जरिए भारतीय सेना को बदनाम करने की नाकाम साजिश

पाकिस्तान समर्थित साइबर सेल और ट्रॉल्स पिछले काफी समय से भारतीय सेना के मनोबल को गिराने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत सैन्य छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए फेक नैरेटिव गढ़ते रहे हैं। हालिया वायरल वीडियो को अगर ध्यान से देखा जाए, तो इसमें इस्तेमाल किए गए दृश्य, वर्दी और भाषा का भारतीय सेना से दूर-दूर तक कोई वास्तविक संबंध नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि जब-जब पाकिस्तान अपनी आंतरिक कंगाली, राजनीतिक अस्थिरता और बलूचिस्तान व खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी हमलों से घिरता है, तब-तब वह अपनी जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत के खिलाफ इस तरह के मनगढ़ंत और एडिटेड वीडियो का सहारा लेने लगता है। लेकिन इस बार भी उसकी यह घटिया साजिश ज्यादा देर नहीं टिक सकी और डिजिटल दुनिया में उसका भांडा फूट गया।

डिजिटल फॉरेंसिक जांच और फैक्ट-चेक से कैसे बेनकाब हुआ पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा?

जब इस वायरल वीडियो की विस्तृत डिजिटल फॉरेंसिक जांच और रिवर्स इमेज सर्च की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। फैक्ट-चेक में यह पूरी तरह साबित हो गया कि यह वीडियो या तो किसी पुराने नाटक/फिल्म का क्लिप है या फिर इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक एडिटिंग टूल्स का इस्तेमाल करके जानबूझकर फर्जी तरीके से तैयार किया गया है। वीडियो में दिख रहे जवानों की वर्दी का पैटर्न और उनके रैंक बैज भारतीय थलसेना के आधिकारिक ड्रेस कोड से बिल्कुल मेल नहीं खाते। इसके अलावा, सीमा सुरक्षा नियमों के तहत किसी भी विदेशी सेना द्वारा भारतीय जवानों की तलाशी लेने जैसा कोई भी घटनाक्रम एलएसी (LAC) पर घटित नहीं हुआ है। भारतीय सुरक्षा बलों ने भी स्पष्ट किया है कि सरहद पर जवान पूरी मुस्तैदी से डटे हुए हैं और सीमा की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है।

एलएसी पर सतर्क भारतीय जवान और प्रोपेगैंडा वॉर के खिलाफ भारत का कड़ा रुख

पूर्वी लद्दाख और संपूर्ण एलएसी पर भारतीय सेना की मौजूदगी बेहद मजबूत और आक्रामक है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त, अत्याधुनिक ड्रोनों द्वारा निगरानी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण ने चीन और उसके पिछलग्गू पाकिस्तान दोनों की नींद उड़ा रखी है। युद्ध के मैदान में बार-बार मात खाने वाला पाकिस्तान अब डिजिटल स्पेस का इस्तेमाल करके 'इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर' (Information Warfare) के जरिए भारत को घेरने की नाकाम कोशिश कर रहा है। हालांकि, भारतीय रक्षा मंत्रालय और साइबर सुरक्षा एजेंसियां ऐसे फर्जी हैंडल्स और फेक न्यूज नेटवर्क पर लगातार पैनी नजर रख रही हैं। पाकिस्तान की इस फर्जी वीडियो वाली चाल का पर्दाफाश होने के बाद दुनिया भर में उसकी किरकिरी हो रही है और नेटिजन्स भी पाकिस्तानी अकाउंट्स को जमकर ट्रोल कर रहे हैं।

फेक न्यूज के इस दौर में पाठकों और नागरिकों के लिए सतर्कता जरूरी

पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए इस झूठ ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर शेयर होने वाली हर बात सच नहीं होती। सुरक्षा विशेषज्ञों ने आम नागरिकों और इंटरनेट यूजर्स से अपील की है कि वे भारतीय सेना या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी संवेदनशील वीडियो या खबर पर बिना आधिकारिक पुष्टि के विश्वास न करें और न ही उसे आगे शेयर करें। भारत की मजबूत कूटनीति और त्वरित फैक्ट-चेकिंग व्यवस्था ने दुश्मनों के फर्जी नैरेटिव को पल भर में ध्वस्त कर दिया है, जिससे यह साफ संदेश जाता है कि भारतीय सेना के शौर्य और सम्मान के खिलाफ उठने वाली हर फर्जी आवाज को इसी तरह बेनकाब किया जाता रहेगा।