दो बड़े झटकों से हिली CJP! अब क्या करेंगे अभिजीत दीपके? सामने आई अंदर की पूरी कहानी!
राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मियों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को सोमवार को दोहरा झटका लगा, जब अदालत ने पार्टी के प्रमुख नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास की न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए और बढ़ा दी। इतना ही नहीं, दिल्ली पुलिस ने इस पूरे संवेदनशील मामले की तफ्तीश अब स्पेशल क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी है।
सीजेपी ने इस कानूनी कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया है कि जमानत मिलने की प्रक्रिया में जानबूझकर अड़चनें डाली जा रही हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि वे दोनों वरिष्ठ नेताओं के बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं और उनके रिहा होने के बाद ही पार्टी की अगली बड़ी रणनीति तय की जाएगी।
दरअसल, यह पूरा विवाद 10 अक्टूबर को शुरू हुआ था, जब सीजेपी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया था। उस दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही सौरभ दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया था। बाद में जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में रांका और दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि 17 अक्टूबर को कनॉट प्लेस पर तिरंगा फहराने के आह्वान के दौरान दीपके को भी कुछ समय के लिए हिरासत में रखकर रिहा कर दिया गया था।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन प्रतिबंधों के बावजूद आशुतोष रांका और सौरभ दास दीवार फांदकर अंदर दाखिल हुए थे और तिरंगा फहराते हुए नारेबाजी की थी। इस मामले में पुलिस ने उनके साथी अजिंक्य शिंदे को 5 हजार रुपये के निजी मुचलके और शांति बनाए रखने के बॉन्ड पर छोड़ दिया था, लेकिन दास और रांका की हिरासत अवधि बढ़ा दी गई, जिस पर अगली सुनवाई अब 21 अक्टूबर को निर्धारित है।
हिरासत बढ़ते ही केस दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को सौंपा गया। पीटीआई सूत्रों के मुताबिक, कनॉट प्लेस थाने में दोनों नेताओं पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223ए (सरकारी आदेश का उल्लंघन), धारा 332 (अनधिकृत घुसपैठ) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, संसद मार्ग थाने में धारा 221 (सरकारी काम में बाधा), 115(2) (चोट पहुंचाना), 132 (ड्यूटी पर तैनात कर्मी पर हमला), 121(1) (लोक सेवक को गंभीर चोट पहुंचाना) और 3(5) (साझा मंशा) के तहत दूसरी प्राथमिकी दर्ज है।
दीपके ने लगाया ये आरोप
मामले के तूल पकड़ने के बाद सीजेपी कानूनी मोर्चा मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने बताया कि उन्होंने देश के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल से कानूनी मशविरा किया है और जरूरत पड़ने पर बड़ी अदालत का रुख करेंगे। दीपके ने आरोप लगाया कि गैर-कानूनी तरीके से हिरासत बढ़ाकर संगठन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
उधर, सीजेपी की लीगल सेल हेड रत्ना सिंह ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए इसे असंवैधानिक और कानून का खुला दुरुपयोग करार दिया। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक इशारे पर दोनों सह-संयोजकों की जमानत को रोका जा रहा है, जिससे निष्पक्ष न्याय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।