राजीव गांधी के हत्यारे प्रभाकरन को CM थलापति विजय ने दी श्रद्धांजलि, क्या कांग्रेस के समर्थन वाली सरकार पर खड़ा हुआ धर्मसंकट?

राजीव गांधी के हत्यारे प्रभाकरन को CM थलापति विजय ने दी श्रद्धांजलि, क्या कांग्रेस के समर्थन वाली सरकार पर खड़ा हुआ धर्मसंकट?

तमिलनाडु की राजनीति में इस समय एक ऐसा अभूतपूर्व और बेहद संवेदनशील विरोधाभास देखने को मिल रहा है, जिसने देश के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हाल ही में कांग्रेस के समर्थन से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले साउथ सिनेमा के दिग्गज 'थलापति' विजय ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के सामने एक बड़ा वैचारिक धर्मसंकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री विजय ने मुल्लीवैक्कल स्मृति दिवस के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मुख्य सूत्रधार रहे लिट्टे (LTTE) चीफ वेलुपिल्लई प्रभाकरन को सार्वजनिक रूप से याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

तमिलनाडु का नया सियासी समीकरण और कांग्रेस का समर्थन

मई 2026 में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे बेहद ऐतिहासिक रहे हैं, जिसने राज्य की दशकों पुरानी स्थापित द्रविड़ राजनीति को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया। अपनी स्थापना के महज दो साल के भीतर सुपरस्टार विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की और सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सत्ता के शिखर तक पहुंच गई। इस चुनाव में द्रमुक (DMK) से अलग होकर किस्मत आजमाने वाली कांग्रेस के 5 विधायकों ने फ्लोर टेस्ट के दौरान विजय की सरकार को अपना खुला समर्थन दिया था। कांग्रेस ने तब तर्क दिया था कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकने और 'पेरियार-कामराज' के आदर्शों पर सरकार चलाने के लिए वे TVK के साथ आए हैं। हाल ही में हुए फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार को 144 विधायकों का समर्थन मिला था, जिसमें कांग्रेस और वामदल बेहद अहम भूमिका में रहे हैं।

प्रभाकरन का महिमामंडन और गठबंधन की विचारधारा में टकराव

इस मजबूत राजनीतिक गठबंधन के बीच विरोधाभास की जड़ें बहुत गहरी और ऐतिहासिक हैं। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 18 मई को 'मुल्लीवैक्कल स्मृति दिवस' के अवसर पर सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर दुनिया भर के तमिल प्रवासियों के साथ एकजुटता व्यक्त की और उनके अधिकारों के लिए अपनी सरकार का समर्थन जारी रखने का संकल्प लिया। टीवीके प्रमुख ने अपनी पोस्ट में लिखा, "आइए हम मुल्लीवैक्कल की यादों को अपने दिलों में संजोकर रखें। हम विदेशों में रहने वाले अपने तमिल भाई-बहनों के अधिकारों के साथ हमेशा खड़े रहेंगे।" हालांकि, कांग्रेस आधिकारिक तौर पर हमेशा से ही लिट्टे की उग्रवादी विचारधारा और उसके हिंसक कृत्यों की घोर विरोधी रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा लिट्टे प्रमुख को इस तरह सार्वजनिक रूप से सम्मानित किए जाने के बाद कांग्रेस बैकफुट पर दिखाई दे रही है।

क्या है 'मुल्लीवैक्कल स्मृति दिवस' और प्रभाकरन का अंत?

दुनिया भर के श्रीलंकाई तमिलों द्वारा हर साल 18 मई को 'मुल्लीवैक्कल स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है। श्रीलंकाई मुल्लीथिवु जिले के एक छोटे से तटीय गांव मुल्लीवैक्कल में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के चीफ वी. प्रभाकरन की मौत के बाद 18 मई 2009 को लगभग तीन दशक पुराना खूनी गृहयुद्ध समाप्त हुआ था। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, इस भयावह युद्ध के अंतिम दौर में लगभग 40,000 से 70,000 तमिल नागरिकों को अपनी जान गवानू पड़ी थी। यही वजह है कि मुल्लीवैक्कल को युद्धकालीन अत्याचारों और नागरिकों की बेइंतहा पीड़ा का एक वैश्विक प्रतीक माना जाता है।

गांधी परिवार का 'बड़ा दिल' बनाम तमिलनाडु की हकीकत

इस पूरे विवाद के बीच गांधी परिवार का एक पुराना और ऐतिहासिक स्टैंड भी काफी चर्चा में आ गया है। प्रियंका गांधी ने कई मौकों पर कहा है कि पिता को खोने का दुख क्या होता है, वह अच्छी तरह जानती हैं। जब उन्होंने अपने पिता राजीव गांधी को खोया, तो वह अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थीं। हालांकि, इस भारी व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद गांधी परिवार ने हमेशा यह साफ किया है कि उनके दिल में अपने पिता के हत्यारों के लिए कोई नफरत या बदला नहीं है।

  • नलिनी को जीवनदान: साल 1991 में राजीव गांधी की आत्मघाती हमले में हत्या की मुख्य दोषी नलिनी श्रीहरन की फांसी की सजा को सोनिया गांधी की विशेष मानवीय अपील के बाद ही उम्रकैद में बदला गया था।

  • प्रियंका गांधी की जेल में मुलाकात: साल 2008 में प्रियंका गांधी ने स्वयं वेल्लोर जेल जाकर नलिनी से गुपचुप मुलाकात की थी, जिसे उन्होंने उस दर्दनाक हादसे से उबरने और खुद को शांत करने का एक माध्यम बताया था।

  • राहुल गांधी का माफीनामा: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी स्पष्ट कह चुके हैं कि उन्हें अपने पिता को खोने का भयंकर दर्द जरूर है, लेकिन उनके मन में हत्यारों के प्रति कोई गुस्सा नहीं है और वह उन्हें दिल से माफ कर चुके हैं।

'नियो-द्रविड़ियन' कार्ड खेल रहे हैं मुख्यमंत्री थलापति विजय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी विजय का अपने पुराने स्टैंड पर कायम रहना यह दिखाता है कि वह तमिलनाडु में एक नया 'नियो-द्रविड़ियन' या 'तमिल राष्ट्रवाद' का कार्ड खेल रहे हैं। वे तमिल अस्मिता और श्रीलंकाई तमिलों की संवेदनाओं से जुड़े इस मुद्दे पर लिट्टे की राजनीतिक लाइन से खुद को अलग नहीं करना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री विजय के इस कड़े 'कोर तमिल' स्टैंड के बाद, उनके समर्थन के सहारे खड़ी कांग्रेस इस वैचारिक मतभेद को किस तरह संभालती है।

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