खतरनाक वायरस का तांडव, 3 बच्चों की मौत से हड़कंप; डॉक्टरों को मिले 'इमरजेंसी' निर्देश, जानें लक्षण और बचाव
महाराष्ट्र की सीमा से सटे पड़ोसी राज्य गुजरात में एक बार फिर बेहद खतरनाक और जानलेवा 'चांदीपुरा वायरस' (Chandipura Virus) को लेकर चिंताएं और दहशत का माहौल चरम पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ ही हफ़्तों के भीतर इस जानलेवा वायरस के संक्रमण की वजह से तीन मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, चार अन्य बच्चे इस समय अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं, जिनका इलाज जारी है।
प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अभी भी आठ संदिग्ध मामलों के टेस्ट रिज़ल्ट (लैब रिपोर्ट) आने का इंतज़ार है, जिससे आंकड़े बढ़ने का खतरा है। चूंकि इस वायरस की चपेट में आने वाले सभी मरीज़ 10 साल से कम उम्र के मासूम बच्चे हैं, इसलिए पूरे राज्य के माता-पिता में भारी डर और चिंता का माहौल है। इस बीच, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराने (पैनिक करने) के बजाय सतर्कता बरतें और बच्चों में कोई भी संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत बिना समय गंवाए नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा एक्शन: अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर बेड रिजर्व करने के आदेश
हालात की गंभीरता को देखते हुए गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने खुद कमान संभाल ली है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने वायरस के प्रसार को काबू में करने के लिए युद्ध स्तर पर खास उपाय शुरू कर दिए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के सहयोग से राज्य भर के सभी सरकारी और निजी बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रहने का सख्त निर्देश दिया गया है।
सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि यदि कोई भी बच्चा चांदीपुरा वायरस के संदिग्ध लक्षणों के साथ आता है, तो उसे बिना किसी देरी के तुरंत अस्पताल में भर्ती किया जाए। इसके साथ ही, आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बच्चों के लिए ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा तुरंत उपलब्ध कराने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने यह भी आदेश दिया है कि अगर किसी बच्चे की हालत गंभीर होती है, तो उसे छोटे अस्पतालों में रखने के बजाय बिना वक्त बर्बाद किए तुरंत बड़े व एडवांस मेडिकल सेंटर्स में ट्रांसफर (रेफर) किया जाए।
61 हॉटस्पॉट पर एक्शन: 2024 के अनुभवों से सीख रही सरकार
यह पहली बार नहीं है जब गुजरात इस संकट का सामना कर रहा है। इससे पहले साल 2024 में भी गुजरात के विभिन्न जिलों में कुल 61 जगहों (हॉटस्पॉट) पर चांदीपुरा वायरस के मामले पाए गए थे। उस समय स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों और सैंडफ्लाई (रेत की मक्खियों) के प्रकोप को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर फॉगिंग, कीटनाशक स्प्रेइंग और जन-जागरूकता अभियान जैसे कड़े उपाय लागू किए थे। सरकार का दावा है कि पूर्व में किए गए इन प्रभावी उपायों के कारण उन प्रभावित इलाकों में कोई भी नया मामला सामने नहीं आया है, लेकिन नए क्षेत्रों में वायरस का दस्तक देना स्वास्थ्य टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
समझिए क्या है चांदीपुरा वायरस और यह कितना खतरनाक है?
इस वायरस का इतिहास भारत से ही जुड़ा हुआ है। चांदीपुरा वायरस की पहचान सबसे पहले देश में महाराष्ट्र के नागपुर ज़िले के 'चांदीपुरा' गाँव में हुई थी, जिसके कारण इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ा। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह वायरस रैब्डोविरिडे (Rhabdoviridae) परिवार के वेसिकुलोवायरस (Vesiculovirus) जीनस से संबंध रखता है। यह वायरस मुख्य रूप से मच्छरों, टिक्स (किलनी) और सैंडफ्लाई (रेत की मक्खियों) जैसे वाहकों (vectors) के काटने से इंसानों में फैलता है। इस वायरस का सबसे सॉफ्ट टारगेट छोटे बच्चे होते हैं क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। संक्रमण की शुरुआत में बच्चों को तेज बुखार और फ्लू जैसे लक्षण होते हैं, जो बेहद कम समय में गंभीर एन्सेफलाइटिस (दिमाग की सूजन) का रूप ले लेते हैं। सही समय पर इलाज न मिलने पर यह दिमागी बुखार जानलेवा साबित होता है।
पेरेंट्स ध्यान दें! अपने बच्चों को इस तरह रखें सुरक्षित
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों ने माता-पिता के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है, ताकि बच्चों को इस जानलेवा संक्रमण की चपेट में आने से बचाया जा सके:
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बच्चों को मच्छरों, टिक्स और रेत की मक्खियों (सैंडफ्लाई) के डंक से पूरी तरह दूर रखें।
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जब भी बच्चे घर से बाहर निकलें या घर में रहें, उन्हें हमेशा पूरी आस्तीन (full-sleeved) वाले कपड़े पहनाएं ताकि शरीर ढका रहे।
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अपने घर के भीतर और आस-पास की जगहों पर जलजमाव न होने दें और पूरी साफ़-सफाई बनाए रखें।
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बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, सिरदर्द या सुस्ती जैसे कोई भी लक्षण दिखने पर खुद डॉक्टर बनने की भूल न करें, तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें।
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मच्छरों और मक्खियों को पनपने से रोकने के लिए नियमित रूप से घर में मॉस्किटो लिक्विड या रिपेलेंट का उपयोग करें।