रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ध्रुव, रुद्र, प्रचंड और आकाश एयर डिफेंस का जिक्र कर भरी हुंकार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ध्रुव, रुद्र, प्रचंड और आकाश एयर डिफेंस का जिक्र कर भरी हुंकार

वैश्विक स्तर पर लगातार बदल रहे भू-राजनीतिक समीकरणों और युद्धक रणनीतियों के बीच भारत ने अपनी रक्षा नीतियों में आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) को सबसे ऊपर रखा है। देश की राजधानी या किसी प्रमुख रक्षा मंच से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने एक बार फिर देश की मजबूत होती सैन्य शक्ति और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की सराहना करते हुए एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में देश के भीतर ही विकसित किए गए अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों और हथियारों का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी देश पर कोई विकट संकट आता है, तब दूसरे देशों पर निर्भरता काम नहीं आती, बल्कि केवल अपने देश में बने हथियार और अपनी तकनीकी ताकत ही देश की रक्षा करती है। रक्षा मंत्री ने भारत के गौरव कहे जाने वाले ध्रुव (Dhruv) हेलीकॉप्टर, रुद्र (Rudra) कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, प्रचंड (Prachand) लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और अचूक मारक क्षमता वाले आकाश एयर डिफेंस सिस्टम (Akash Air Defence System) का विशेष तौर पर उल्लेख करते हुए देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और रक्षा उद्योगों की पीठ थपथपाई है।

आयात पर निर्भरता घटाने का ऐतिहासिक संकल्प: कैसे बदल रही है भारतीय सेना की तस्वीर?

आजादी के कई दशकों तक भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए दुनिया के अन्य बड़े देशों से हथियार आयात करने पर सबसे ज्यादा निर्भर रहता था, जिससे न केवल भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती थी, बल्कि रणनीतिक रूप से भी कई बार अनिश्चितता बनी रहती थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश की रक्षा नीति में जो क्रांतिकारी बदलाव आया है, उसके तहत 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को जमीन पर उतारकर भारत को ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आज भारतीय सेनाएं केवल खरीदार नहीं रह गई हैं, बल्कि वे दुनिया के सबसे आधुनिक और स्वदेशी रूप से निर्मित रक्षा उपकरणों का उपयोग कर रही हैं। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में डिफेंस कॉरिडोर के निर्माण से लेकर प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी तक, हर मोर्चे पर देश ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ध्रुव, रुद्र और प्रचंड से आसमान में गूंज रही भारत की ताकत, दुश्मनों के लिए बना खौफ का पर्याय

भारतीय वायु सेना और थल सेना के बेड़े में शामिल किए गए स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की ताकत आज पूरी दुनिया देख रही है। रक्षा मंत्री द्वारा विशेष रूप से उल्लेख किए गए एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर 'ध्रुव' ने दुर्गम पहाड़ी इलाकों और आपदा राहत अभियानों में अपनी उपयोगिता साबित की है। वहीं, आक्रामक अभियानों के लिए तैयार किया गया 'रुद्र' और दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रों में भी आसानी से उड़ान भरने में सक्षम 'प्रचंड' लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ने भारतीय सेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। इसके अलावा, जमीन से हवा में दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद करने वाला 'आकाश एयर डिफेंस सिस्टम' आज देश की हवाई सुरक्षा का सबसे मजबूत किला बन चुका है। इन सभी स्वदेशी उपकरणों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें भारत की भौगोलिक परिस्थितियों और जरूरतों के मुताबिक विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जिससे युद्ध के मैदान में ये अचूक साबित होते हैं।

रक्षा क्षेत्र में निर्यात की नई उड़ान: दुनिया के कई देश खरीद रहे हैं भारत में बने हथियार

आत्मनिर्भरता का यह सफर अब केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत अब दुनिया के कई मित्र देशों को हथियारों का निर्यात (Defence Exports) करने वाला प्रमुख देश बनता जा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल, गश्त लगाने वाले नौसैनिक पोत, रडार सिस्टम और स्वदेशी तोपों को खरीदने के लिए दुनिया भर के कई देश भारत से संपर्क साध रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विश्वास जताया है कि आने वाले समय में भारत रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ दुनिया के शीर्ष हथियार निर्यातक देशों की पंक्ति में भी मजबूती से खड़ा होगा। देश के युवाओं, स्टार्टअप्स और रक्षा वैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयासों से यह साफ हो गया है कि भविष्य का भारत अपनी रक्षा सुरक्षा के मामले में किसी भी बाहरी ताकत के आगे झुकने वाला नहीं है, बल्कि अपनी दम पर हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम है।