नाच ना जाने, आंगन टेढ़ा... अमित शाह का राहुल गांधी पर तंज- 'मॉक पार्लियामेंट में ही PM बन सकते हैं'

नाच ना जाने, आंगन टेढ़ा... अमित शाह का राहुल गांधी पर तंज- 'मॉक पार्लियामेंट में ही PM बन सकते हैं'

देश के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और तीखी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर अब तक का सबसे जोरदार और सियासी हमला बोला है। एक सार्वजनिक मंच से विपक्ष पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने पुरानी कहावत 'नाच न जाने, आंगन टेढ़ा' का जिक्र किया और राहुल गांधी की कार्यशैली पर जमकर तंज कसा। अमित शाह ने चुटकी लेते हुए कहा कि राहुल गांधी केवल 'मॉक पार्लियामेंट' (नकली या सांकेतिक संसद) में ही प्रधानमंत्री बनने का अपना सपना पूरा कर सकते हैं, क्योंकि देश की जनता का भरोसा और जनादेश पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है। गृह मंत्री के इस बयान के बाद से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है।

अमित शाह का राहुल गांधी पर जोरदार वार: 'नाच न जाने, आंगन टेढ़ा'

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान चुनावी नतीजों और संसदीय प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ता है, तो राहुल गांधी और उनकी पार्टी ईवीएम (EVM), चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर दोष मढ़ना शुरू कर देती है। यही असली मायने में 'नाच न जाने, आंगन टेढ़ा' की स्थिति है, जहां अपनी खुद की कमियों और जनाधार की कमी को छिपाने के लिए व्यवस्था को खराब बताया जाता है। अमित शाह ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के फैसले को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए, लेकिन कांग्रेस पार्टी अपनी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने के अलावा कुछ नहीं करती।

'मॉक पार्लियामेंट में ही पीएम बन सकते हैं राहुल': गृह मंत्री का तंज

भाषण के सबसे तीखे मोड़ पर अमित शाह ने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षाओं पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने मजाकिया और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि देश के असली लोकतंत्र और संसद में तो जनता बार-बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर अपनी मुहर लगा रही है। ऐसे में अगर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनने का बहुत ज्यादा शौक है, तो वे बच्चों की 'मॉक पार्लियामेंट' (प्रतीकात्मक संसद) में ही बैठकर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाल सकते हैं। गृह मंत्री के इस बयान पर वहां मौजूद समर्थकों ने जमकर तालियां बजाईं, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह ने यह तंज कसकर विपक्ष के पीएम चेहरे के मुद्दे को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

ईवीएम और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने पर विपक्ष को घेरा

अमित शाह ने अपने भाषण में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि देश की सबसे पुरानी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व संवैधानिक ढांचे की गरिमा का ख्याल नहीं रख रहा है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस किसी राज्य में चुनाव जीतती है (जैसे हिमाचल या कर्नाटक), तब ईवीएम पूरी तरह सही काम करती है, लेकिन जहां भी भाजपा की प्रचंड जीत होती है, वहां तुरंत धांधली के आरोप लगाने शुरू कर दिए जाते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि देश की समझदार जनता विपक्ष के इस दोहरे रवैये को बहुत अच्छी तरह समझ चुकी है और यही वजह है कि लगातार चुनावों में कांग्रेस को शिकस्त का सामना करना पड़ रहा है।

संसद के आगामी सत्र से पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर

अमित शाह के इस बयान ने आगामी संसदीय सत्र से ठीक पहले देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस समेत पूरे 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने गृह मंत्री के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि गृह मंत्री देश के मुख्य ज्वलंत मुद्दों जैसे महंगाई, बेरोजगारी और सीमा सुरक्षा से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष के नेता पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। दोनों ओर से हो रही बयानबाजी से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में संसद और सड़क दोनों जगह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भयंकर राजनीतिक घमासान देखने को मिलेगा।

जनता का जनादेश और भारत की राजनीतिक दिशा

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी का एकमात्र लक्ष्य देश का सर्वांगीण विकास और अंतिम व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता अब नकारात्मक राजनीति और खोखले वादों को पूरी तरह खारिज कर चुकी है। विकास, सुशासन और मजबूत नेतृत्व ही नए भारत की पहचान बन चुके हैं। अमित शाह का यह आक्रामक भाषण न केवल आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाला है, बल्कि इसने देश के सामने एक बार फिर यह संदेश दे दिया है कि भाजपा अपने विरोधियों को राजनीतिक पिच पर कोई ढील देने के मूड में बिल्कुल नहीं है।