जम्मू-कश्मीर के पटनीटॉप होटल भूमि अतिक्रमण मामले में ED का बड़ा एक्शन: करोड़ों की बेनामी संपत्तियां कुर्क
जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध और सुरम्य पर्वतीय पर्यटन स्थल पटनीटॉप (Patnitop) में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले रसूखदारों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। पटनीटॉप के प्रमुख होटल भूमि अतिक्रमण और अवैध निर्माण मामले में ईडी की टीमों ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत ताबड़तोड़ एक्शन लेते हुए कई बड़े लग्जरी होटलों और रिजॉर्ट्स की करोड़ों रुपये मूल्य की बेनामी संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है। जांच एजेंसी के इस आक्रामक और अभूतपूर्व कदम के बाद से जम्मू-कश्मीर के भू-माफियाओं, भ्रष्ट अधिकारियों और अवैध रूप से होटल चलाने वाले रसूखदार मालिकों के बीच हड़कंप मच गया है। आइए जानते हैं कि आखिर पटनीटॉप होटल भूमि अतिक्रमण का यह पूरा घोटाला क्या है और ईडी ने इसमें किस तरह शिकंजा कसा है।
क्या है पटनीटॉप होटल भूमि अतिक्रमण मामला और कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला?
जम्मू के उधमपुर और रामबन जिलों की सीमा पर स्थित पटनीटॉप एक बेहद खूबसूरत और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील हिल स्टेशन माना जाता है। पिछले कुछ दशकों के दौरान यहां पर्यटन विकास प्राधिकरण (PDA) की सैकड़ों कनाल की बेशकीमती फॉरेस्ट और सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जे किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। रसूखदार होटल मालिकों ने स्थानीय अधिकारियों और पटनीटॉप डेवलपमेंट अथॉरिटी के अफसरों के साथ मिलकर मास्टर प्लान के नियमों को दरकिनार कर दिया। कृषि और वन भूमि के इस्तेमाल का स्वरूप बदलकर वहां बड़े-बड़े बहुमंजिला लग्जरी होटलों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों और रिजॉर्ट्स का निर्माण करा लिया गया। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए तय किए गए ग्रीन जोन और एफएआर (FAR) नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण को अंजाम दिया गया।
सीबीआई जांच के बाद हुई ईडी की एंट्री और मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा खुलासा
इस पूरे घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने पूर्व में मामले की विस्तृत जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी थी। सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर वित्तीय अपराधों की जांच करने वाली एजेंसी ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आपराधिक जांच शुरू की। ईडी की वित्तीय जांच में यह चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई कि होटल मालिकों ने अवैध रूप से कब्जाई गई सरकारी जमीनों पर बने होटलों के जरिए करोड़ों रुपये की काली कमाई (Proceeds of Crime) अर्जित की। इस अवैध धन को सफेद बनाने के लिए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया और बेनामी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की गई। ईडी की फॉरेंसिक टीम ने बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों का मिलान करने के बाद कार्रवाई का पूरा खाका तैयार किया।
ईडी की ताबड़तोड़ कुर्का और सीलिंग की कार्रवाई: कई बड़े होटलों पर लटका ताला
जांच में पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ईडी के श्रीनगर और जम्मू जोनल कार्यालय की टीमों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पटनीटॉप के कई नामी गिरामी और प्रमुख होटलों की इमारतों व उससे जुड़ी भूमि को कुर्क कर लिया है। कुर्क की गई इन संपत्तियों की बाजार में कुल कीमत कई सौ करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। ईडी की टीम ने भारी पुलिस बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की मौजूदगी में इन संपत्तियों पर जब्ती और कुर्का के नोटिस चस्पा कर दिए। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपत्तियों की विस्तृत पैमाइश की गई और उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया, जिससे किसी भी तरह का वित्तीय लेन-देन न किया जा सके।
भ्रष्ट अधिकारियों और रसूखदार होटल मालिकों की सांठगांठ पर कसेगा शिकंजा
पटनीटॉप भूमि अतिक्रमण घोटाला केवल होटल मालिकों के दुस्साहस तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार सरकारी विभागों में बैठे उच्च अधिकारियों से भी जुड़े हुए हैं। ईडी की जांच के दायरे में पटनीटॉप विकास प्राधिकरण के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), राजस्व विभाग के वरिष्ठ तहसीलदार, पटवारी और वन विभाग के कई अधिकारी आ चुके हैं, जिन्होंने रिश्वत और निजी हितों के एवज में अवैध निर्माणों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और बिजली-पानी के कनेक्शन जारी किए थे। ईडी जल्द ही इस मामले में शामिल सभी संदिग्ध अधिकारियों को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब करने वाली है, जिसके बाद कई बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारियां भी संभव मानी जा रही हैं।
जम्मू-कश्मीर के पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन पर ईडी के एक्शन का असर
पटनीटॉप जैसे नाजुक पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में बेकाबू और अवैध निर्माण के कारण पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा था। पहाड़ों को काटकर बनाई जा रही इन बहुमंजिला इमारतों से भूस्खलन और प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने का खतरा मंडरा रहा था। ईडी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा की जा रही इस सख्त कार्रवाई से न केवल सरकारी जमीनों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने में सफलता मिलेगी, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केंद्र शासित प्रदेश में किसी भी भू-माफिया या अवैध कब्जाधारक को बख्शा नहीं जाएगा और राज्य की प्राकृतिक सुंदरता व पारिस्थिकी से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।