पोखरण से जोशीमठ तक कांपा दुश्मन! स्वदेशी सुसाइड ड्रोन 'वायु अस्त्र' ने 100 KM दूर रात के अंधेरे में दागा सटीक निशाना

पोखरण से जोशीमठ तक कांपा दुश्मन! स्वदेशी सुसाइड ड्रोन 'वायु अस्त्र' ने 100 KM दूर रात के अंधेरे में दागा सटीक निशाना

भारतीय रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत एक और ऐतिहासिक और बेहद सुरक्षात्मक मील का पत्थर हासिल कर लिया गया है। पुणे की मशहूर डिफेंस फर्म नीबे लिमिटेड (Nibe Limited) ने देश में ही तैयार किए गए 100 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले अपने बेहद आधुनिक लोइटरिंग म्यूनिशन (जिसे आम भाषा में सुसाइड या कामिकेज़ ड्रोन भी कहा जाता है) 'वायु अस्त्र' (Vayu Astra) का 'नो-कॉस्ट, नो-कमिटमेंट' (NCNC) ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। सबसे खास बात यह है कि इस घातक स्वदेशी हथियार का परीक्षण देश के दो अलग-अलग भौगोलिक कोनों—राजस्थान के धधकते पोखरण रेगिस्तान और उत्तराखंड के जोशीमठ की हाड़ कंपाने वाली बर्फीली पहाड़ियों में किया गया, जहां इसने अपनी ताकत का लोहा मनवाया।

पोखरण में 'वायु अस्त्र' का धमाका: 100 किमी दूर टारगेट का किया पूरी तरह खात्मा

कंपनी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, 18 और 19 अप्रैल को राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में 'वायु अस्त्र-1' (एंटी-पर्सनल वेरिएंट) का पहला कड़ा परीक्षण किया गया। लगभग 10 किलोग्राम वजनी विनाशकारी वॉरहेड (विस्फोटक) ले जाने की क्षमता से लैस इस आत्मघाती ड्रोन ने उड़ान भरने के बाद 100 किलोमीटर दूर स्थित अपने गुप्त लक्ष्य को महज एक ही प्रयास में पूरी सटीकता के साथ नामोनिशान मिटा दिया।

इस परीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बात इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) रहा, जो 1 मीटर से भी कम दर्ज किया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि यह ड्रोन अपने तय लक्ष्य से एक मीटर भी इधर-उधर नहीं भटका, जो आधुनिक सैन्य मानकों में बेहद दुर्लभ और अचूक माना जाता है।

रात के घने अंधेरे में भी एंटी-टैंक नाइट स्ट्राइक का सफल शिकार

इजरायली अत्याधुनिक तकनीक से प्रेरित इस लोइटरिंग म्यूनिशन की सबसे बड़ी खूबी इसकी 'अबॉर्ट-अटैक' और 'री-अटैक' क्षमता है। यानी अगर ऑपरेटर को ऐन वक्त पर लगे कि टारगेट बदल गया है या वहां कोई नागरिक मौजूद हैं, तो हमले को बीच हवा में ही रोका जा सकता है और यह ड्रोन मंडराते हुए दोबारा हमले के लिए तैयार हो जाता है।

कंपनी ने दावा किया कि इसके 'एंटी-आर्मर' (एंटी-टैंक) वेरिएंट का जब रात में परीक्षण किया गया, तो इसने अपने हाई-टेक इन्फ्रारेड (IR) कैमरों की बदौलत घने काले अंधेरे में भी दुश्मन के टैंकों के डमी ठिकानों को ढूंढ निकाला और सिर्फ 2 मीटर के बेहद कम अंतर के साथ सटीक प्रहार किया। इतना ही नहीं, 70 किलोमीटर दूर उड़ रहे इस ड्रोन के नियंत्रण को ग्राउंड स्टेशन से फॉरवर्ड कंट्रोल सेगमेंट को सौंपने (कंट्रोल हैंडओवर) की जटिल तकनीक का भी सफल प्रदर्शन किया गया।

जोशीमठ की 14,000 फीट की दुर्गम ऊंचाइयों पर 90 मिनट तक भरी हुंकार

मैदानी और रेतीले इलाकों में अपनी ताकत दिखाने के बाद 26 और 27 अप्रैल को इस ड्रोन की परीक्षा उत्तराखंड के जोशीमठ (मलारी) के बेहद ऊंचे पहाड़ी इलाकों में हुई। यहां 'वायु अस्त्र-1' की 'हाई-एल्टीट्यूड एंड्योरेंस' यानी कम ऑक्सीजन और भारी हवा के दबाव वाले ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता को परखा गया।

हैरान करने वाली बात यह रही कि चीन सीमा के करीब 14,000 फीट से भी अधिक की ऊंचाई वाले इस बर्फीले क्षेत्र में इसने न केवल 90 मिनट से ज्यादा समय तक लगातार उड़ान भरी, बल्कि अपने सभी मिशनों को बिना किसी तकनीकी खराबी के सफलतापूर्वक अंजाम दिया। मिशन पूरा होने के बाद इस सिस्टम ने भविष्य की अगली उड़ानों के लिए सुरक्षित रिकवरी करने की अपनी अद्भुत क्षमता को भी साबित किया।

'सूर्यास्त्र' रॉकेट लॉन्चर का भी चांदीपुर में हुआ सफल फायर टेस्ट

पुणे की इस रक्षा कंपनी ने अपनी इस कामयाबी के सिलसिले को यहीं नहीं रोका। इससे ठीक पहले 20 मई को कंपनी ने अपने 'सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम' के भी सफल परीक्षण की घोषणा की थी। ओडिशा के चांदीपुर में स्थित अंतरिम परीक्षण रेंज (ITR) में 18 और 19 मई को लगातार कई बैक-टू-बैक टेस्ट किए गए, जिसमें असाधारण सटीकता देखने को मिली।

आपको बता दें कि भारतीय सेना ने जनवरी 2026 में आपातकालीन खरीद (Emergency Procurement) नियमों के तहत नीबे ग्रुप को इस खास रॉकेट लॉन्चर और इसके साथ इस्तेमाल होने वाले 150 किमी व 300 किमी की लंबी रेंज वाले रॉकेटों की सप्लाई का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट सौंपा था, जिस पर कंपनी बेहद तेज रफ्तार से काम कर रही है।

क्या होता है सेना का यह 'NCNC' ट्रायल?

रक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुसार, जब भी सेना किसी नए स्वदेशी या विदेशी उत्पाद का परीक्षण करती है, तो कई बार उसे 'नो-कॉस्ट, नो-कमिटमेंट' (NCNC) के आधार पर किया जाता है। इसका सरल शब्दों में अर्थ यह है कि इन कठोर और कई चरणों में होने वाले परीक्षणों के दौरान आने वाले खर्च का भुगतान सरकार नहीं करती है, और न ही ट्रायल पास होने के बाद सरकार पर उस कंपनी से अनिवार्य रूप से हथियार खरीदने की कोई कानूनी प्रतिबद्धता होती है। यह पूरी तरह से उत्पाद की गुणवत्ता और सेना की अंतिम आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। वायु अस्त्र के इस सफल प्रदर्शन के बाद अब इसके भारतीय सेना में जल्द शामिल होने का रास्ता पूरी तरह साफ माना जा रहा है।

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