दिवाली पर फ्री LPG सिलेंडर: यूपी, दिल्ली समेत इन राज्यों में खाते में आएंगे पैसे, जानें बुकिंग व DBT नियम

दिवाली पर फ्री LPG सिलेंडर: यूपी, दिल्ली समेत इन राज्यों में खाते में आएंगे पैसे, जानें बुकिंग व DBT नियम

त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए रसोई के मोर्चे पर बड़ी राहत की तैयारी है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाली केंद्रीय सब्सिडी के साथ-साथ कई राज्य सरकारें अपने स्तर पर त्योहारों के मौके पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही हैं। यह मदद हर राज्य में स्थानीय नियमों, राशन कार्ड की श्रेणी और तय पात्रता के आधार पर सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई जाती है।

उत्तर प्रदेश में सरकार उज्ज्वला योजना के पात्र परिवारों को साल में दो बार मुफ्त गैस सिलेंडर का लाभ देती है। यह सुविधा होली और दिवाली के मौके पर दी जाती है, जिसके तहत तय राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। वहीं दिल्ली में राशन कार्ड धारक पात्र परिवारों को त्योहार पर एक LPG सिलेंडर की कीमत के बराबर नकद सहायता DBT के माध्यम से आधार लिंक खाते में भेजने का प्रावधान है। दिल्ली में PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) का उपयोग करने वाले चिन्हित परिवारों को भी इसी तर्ज पर नकद राहत की व्यवस्था है।

अन्य राज्यों में भी स्थानीय स्तर पर अलग-अलग योजनाएं लागू हैं। आंध्र प्रदेश सरकार अपनी 'दीपम 2.0' योजना के जरिए पात्र महिलाओं को सालाना तीन LPG सिलेंडर की सहायता देती है। उत्तराखंड में अंत्योदय अन्न योजना (AAY) कार्ड धारक परिवारों को साल में तीन मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर दिए जाते हैं। इसी प्रकार गोवा में कम आय वर्ग के परिवारों को वार्षिक LPG सहायता और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी पात्र अंत्योदय परिवारों को अतिरिक्त सिलेंडर सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।

इस सरकारी सहायता का लाभ बिना रुकावट पाने के लिए लाभार्थियों को कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी रखना अनिवार्य है। गैस कनेक्शन की e-KYC पूरी होनी चाहिए और बैंक खाता आधार से लिंक व सक्रिय (Active) रहना जरूरी है। यदि आधार, बैंक खाते या गैस एजेंसी के रिकॉर्ड में नाम या स्पेलिंग का अंतर होगा, तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की किस्त अटक सकती है।

अधिकांश राज्यों में DBT व्यवस्था के तहत काम होता है, इसलिए उपभोक्ताओं को पहले सामान्य तरीके से तय कीमत चुकाकर सिलेंडर बुक और रिसीव करना होता है। इसके बाद सरकार द्वारा निर्धारित सब्सिडी या पूरी कीमत की प्रतिपूर्ति सीधे बैंक खाते में क्रेडिट कर दी जाती है। डिलीवरी से पहले अपने राज्य के मौजूदा दिशा-निर्देशों और एजेंसी रिकॉर्ड की जांच अवश्य कर लें।