6 किमी पैदल चलकर स्कूल जाता था, लौटकर खेतों में करता था काम
सफलता की चमक और बुलंदी पर पहुंचने के बाद अक्सर लोग अपने अतीत के संघर्षों को भूल जाते हैं, लेकिन कुछ राजनेता और दिग्गज शख्सियतें ऐसी होती हैं जो अपनी जड़ों और मुश्किल दिनों को कभी नहीं भूलतीं। हाल ही में एक ऐसा ही प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाला वाकया सामने आया जब एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से रूबरू होते हुए अपने बचपन और शुरुआती जीवन के संघर्षों की खुली किताब खोल दी। मुख्यमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए बेहद भावुक अंदाज में बताया कि कैसे वे अपने शुरुआती दिनों में रोजाना करीब छह किलोमीटर का लंबा सफर पैदल तय करके स्कूल पढ़ने जाया करते थे और स्कूल से वापस लौटने के बाद सीधे अपने परिवार के साथ खेतों में जाकर कड़ी मेहनत और किसानी का काम किया करते थे। उनके इस बेबाक और जमीन से जुड़े हुए संस्मरण को सुनकर वहां मौजूद हर एक छात्र और शिक्षक की आंखें नम हो गईं और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
अभावों से भरी थी शुरुआती जिंदगी, लालटेन की रोशनी में पढ़ाई कर तय किया फर्श से अर्श तक का सफर
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उस दौर में जीवन की राह इतनी आसान नहीं थी जैसी आज की पीढ़ी को आसानी से मिल जाती है। न तो पक्की सड़कें थीं, न ही यातायात के आधुनिक साधन और न ही आज की तरह बिजली की कोई पुख्ता व्यवस्था हुआ करती थी। गांवों के कच्चे रास्तों से गुजरते हुए स्कूल पहुंचना और फिर घर आकर खेतों की उबड़-खाबड़ जमीन पर पसीना बहाना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हुआ करता था। शाम ढलने के बाद जब घरों में बिजली नहीं होती थी, तब वे ढिबरी या लालटेन की झिलमिलाती रोशनी में बैठकर अपनी पढ़ाई पूरी करते थे। मुख्यमंत्री ने नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को यह सीख दी कि जिंदगी में मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, यदि आपके भीतर कुछ कर दिखाने का जज्बा और पक्का इरादा है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।
आधुनिक छात्रों को कड़ा संदेश: सुख-सुविधाओं के बीच भी मेहनत और अनुशासन से ही तय होती है मंजिल
आज के दौर में जब छात्र-सुविधाओं और आधुनिक गैजेट्स के बीच अपनी पढ़ाई करते हैं, तब मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई यह संघर्ष गाथा उन्हें यह अहसास कराती है कि बिना कड़े परिश्रम और अनुशासन के जीवन में कोई मुकाम हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि आज के समय में युवाओं के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता इस बात की है कि वे उस ऊर्जा और समय का सही दिशा में सदुपयोग करें। यदि आप अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार हैं और विपरीत परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनका डटकर मुकाबला करते हैं, तो सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी। मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें जीवन में हमेशा विनम्र रहने और समाज के सबसे कमजोर तबके के प्रति संवेदनशील बनने का भी बहुमूल्य पाठ पढ़ाया।
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं और शिक्षकों ने सराहा, मुख्यमंत्री के इस अंदाज ने जीता सबका दिल
इस विशेष संवाद कार्यक्रम के समापन के बाद वहां मौजूद युवाओं, अभिभावकों और शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के इस सहज और सरल स्वभाव की भूरी-भूरी प्रशंसा की। एक बड़े पद पर आसीन होने के बावजूद अपने अतीत के संघर्षों को इस प्रकार खुले दिल से साझा करना और उससे नई पीढ़ी को प्रेरित करना वास्तव में एक जननेता की असली पहचान को दर्शाता है। यह प्रेरक प्रसंग सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार माध्यमों में भी चर्चा का केंद्र बन गया है, जहां लोग इस बात की सराहना कर रहे हैं कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर कड़े संघर्षों के बल पर शीर्ष पद तक पहुंचने वाला व्यक्ति आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ा प्रेरणा स्त्रोत बन सकता है।