ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार पाकिस्तान को भारत का न्योता, SCO फोरम के लिए बुलाए गए पाकिस्तानी मंत्री

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार पाकिस्तान को भारत का न्योता, SCO फोरम के लिए बुलाए गए पाकिस्तानी मंत्री

सामरिक और कूटनीतिक मोर्चे पर एक बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सीमा पार से जारी तनाव और ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पहली बार भारत सरकार ने पाकिस्तान को आधिकारिक न्योता भेजा है। भारत की मेजबानी में आयोजित हो रही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तानी मंत्री और शीर्ष प्रतिनिधियों को नई दिल्ली आने का औपचारिक निमंत्रण पत्र जारी किया गया है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से जारी कूटनीतिक गतिरोध और तल्खी के बीच इस न्योते को अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मोड़ मान रहे हैं। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि यह निमंत्रण बहुपक्षीय क्षेत्रीय मंच SCO की तय परंपराओं और दायित्वों के तहत भेजा गया है, लेकिन सीमा पार जारी आतंकवाद और द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत का कड़ा रुख पहले की तरह ही कायम है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदला कूटनीतिक परिदृश्य और SCO फोरम के जरिए बहुपक्षीय वार्ताओं का पूरा सच

हाल ही में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में भारी तनाव देखने को मिला था। भारत ने सीमा पार प्रायोजित गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बहुपक्षीय मंचों पर भी पाकिस्तान को अलग-थलग करने की नीति अपनाई थी। ऐसे में नई दिल्ली द्वारा SCO शिखर सम्मेलन और मंत्रिस्तरीय बैठकों के लिए भेजा गया यह न्योता क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा संवाद की दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। शंघाई सहयोग संगठन का सदस्य होने के नाते भारत अपने बहुपक्षीय दायित्वों को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभा रहा है, जहाँ चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। इस बहुपक्षीय सम्मेलन में आतंकवाद विरोधी फ्रेमवर्क (RATS), क्षेत्रीय व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है।

इस्लामाबाद से आ रही खबरों के मुताबिक, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय इस निमंत्रण पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के नई दिल्ली आगमन की संभावनाओं को लेकर कूटनीतिक गलियारों में भारी उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद यह पहला मौका होगा जब दोनों देशों के उच्च स्तर के प्रतिनिधि एक ही टेबल पर आमने-सामने होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यद्यपि यह न्योता किसी द्विपक्षीय वार्ता का संकेत नहीं है, फिर भी वैश्विक मंचों पर भारत का यह कदम एक परिपक्व और जिम्मेदार क्षेत्रीय महाशक्ति की भूमिका को मजबूती से प्रदर्शित करता है।