कौन हैं प्रियांशु मोलिया... जिन्होंने रणजी ट्रॉफी में खेली 321 रन की पारी, 79 साल पुराना रिकॉर्ड स्वाहा
भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) के मैदान पर इन दिनों एक ऐसे युवा बल्लेबाज का तूफान आया है, जिसने पूरे देश के क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया है। घरेलू क्रिकेट के इस महाकुंभ में रनों का अंबार लगाते हुए एक नया और अविश्वसनीय इतिहास रच दिया गया है। बड़ौदा (Baroda) के युवा और प्रतिभाशाली बल्लेबाज प्रियांशु मोलिया (Priyanshu Moliya) ने रणजी ट्रॉफी के एक मुकाबले में अपनी अद्भुत बल्लेबाजी का लोहा मनवाते हुए नाबाद 321 रनों की महा-ऐतिहासिक पारी खेल डाली। प्रियांशु ने इस मैराथन पारी के दौरान मैदान के चारों तरफ चौकों और छक्कों की बरसात कर दी और विपक्षी गेंदबाजों के तरकस के सभी तीरों को पूरी तरह नाकाम साबित कर दिया। अपनी इस रिकॉर्डतोड़ तिहरे शतक (Triple Century) की बदौलत प्रियांशु मोलिया ने पिछले 79 सालों से चले आ रहे एक पुराने और दिग्गज रिकॉर्ड को पूरी तरह स्वाहा (धुंधला) कर दिया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि के बाद से ही भारतीय क्रिकेट गलियारों में उनके भविष्य और टीम इंडिया में एंट्री को लेकर कयासों का दौर शुरू हो चुका है।
कौन हैं प्रियांशु मोलिया? जानिए इस युवा खिलाड़ी का संघर्ष, घरेलू क्रिकेट का सफर और उनकी बैटिंग स्टाइल
क्रिकेट जगत में अचानक चर्चा का केंद्र बने प्रियांशु मोलिया कोई अचानक उभरा हुआ नाम नहीं है, बल्कि उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और पसीने के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। कम उम्र से ही क्रिकेट के प्रति जुनूनी रहे प्रियांशु ने अपनी स्थानीय अकादमियों और आयु वर्ग (Age-group cricket) के टूर्नामेंटों में लगातार शानदार प्रदर्शन करके चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा था। उनकी तकनीक पारंपरिक और आधुनिक शॉट-मेकिंग का एक बेहतरीन मिश्रण है, जो उन्हें लंबे फॉर्मेट (रेड-बॉल क्रिकेट) में टिककर खेलने की असाधारण क्षमता प्रदान करती है। क्रीज पर पैर जमाकर गेंदबाजों के धैर्य की परीक्षा लेना उनकी सबसे बड़ी खूबी है। रणजी ट्रॉफी के इस मौजूदा सीजन में जब उनकी टीम को सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब प्रियांशु ने जिम्मेदारी का अहसास करते हुए अपनी टीम की नैया को संकट से निकाला और इतिहास के पन्नों में अपना नाम अमर कर लिया।
79 साल पुराना रिकॉर्ड कैसे हुआ ध्वस्त? जानिए प्रियांशु मोलिया के इस तिहरे शतक की पूरी इनसाइड स्टोरी
प्रियांशु मोलिया द्वारा खेली गई 321 रनों की यह नाबाद पारी घरेलू क्रिकेट इतिहास की सबसे बेहतरीन पारियों में गिनी जाने लगी है। उन्होंने जिस रिकॉर्ड को तोड़ा है, वह भारतीय घरेलू सर्किट में दशकों से दिग्गजों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। पिछले 79 वर्षों में रणजी ट्रॉफी के इतिहास में किसी भी युवा बल्लेबाज द्वारा इतनी कम उम्र में और इतने आक्रामक व संयमित अंदाज में तिहरा शतक लगाने का कारनामा बेहद दुर्लभ रहा है। प्रियांशु ने अपनी इस मैराथन पारी के दौरान लगभग 500 से ज्यादा गेंदों का सामना किया और मैदान पर घंटों तक डटकर खड़े रहे। उन्होंने विपक्षी टीम के तेज गेंदबाजों और स्पिनर्स—दोनों की धज्जियां उड़ाते हुए क्रीज पर ऐसा आधिपत्य जमाया कि विरोधी कप्तान अपनी रणनीति बदलते-बदलते थक गए। उनके इस बेहतरीन तिहरे शतक ने न केवल उनकी घरेलू टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाया, बल्कि राष्ट्रीय चयनकर्ताओं (BCCI Selectors) के सामने भी एक मजबूत दावा पेश कर दिया है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि प्रियांशु मोलिया जैसी प्रतिभाएं भारतीय क्रिकेट की बेंच स्ट्रेंथ को और अधिक मजबूत करती हैं। आने वाले समय में इंडिया ए (India A) दौरों और आगामी घरेलू सीरीज में प्रियांशु पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। जिस तरह से उन्होंने अपनी इस 321 रनों की रिकॉर्डतोड़ पारी से क्रिकेट पंडितों को मुग्ध किया है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह युवा बल्लेबाज भारतीय क्रिकेट का एक नया सितारा बनकर चमकने वाला है।