भारत का 64 साल पहले खोया वो 'कीमती टुकड़ा', जिस पर कुंडली मारकर बैठा है 'ड्रैगन'; अब अपनी ही चाल में फंसकर परेशान क्यों है चीन?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का इतिहास दशकों पुराना है, लेकिन साल 1962 की लड़ाई के बाद से कुछ भू-भाग ऐसे रहे हैं जो रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गए हैं। इनमें से एक ऐसा ही कीमती और सामरिक रूप से अहम टुकड़ा वह है, जिसे भारत ने दशकों पहले खो दिया था और आज उस पर चीन ने अवैध कब्जा जमाया हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन पर ड्रैगन लंबे समय से कुंडली मारकर बैठा था, अब वही जमीन उसके लिए सिरदर्द बन गई है। भारत की बढ़ती सामरिक ताकत और सामरिक सुदृढ़ीकरण को देखकर अब चीन को हर पल यह जमीन गंवाने का खौफ सताने लगा है।
क्या है 64 साल पुराना वो रणनीतिक विवाद और इतिहास?
साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान और उसके आसपास के घटनाक्रमों में लद्दाख और अक्साई चीन के साथ-साथ कुछ ऐसे सामरिक क्षेत्र भी प्रभावित हुए थे, जिन पर चीन ने अपनी विस्तारवादी नीतियों के तहत कब्जा जमा लिया था। यह भू-भाग न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहाँ से तिब्बत और लद्दाख के कई संवेदनशील इलाकों पर सीधी नजर रखी जा सकती है। भारत लगातार कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर इस बात को उठाता रहा है कि चीन ने ऐतिहासिक समझौतों को ताक पर रखकर इस क्षेत्र पर कब्जा किया है। दशकों से यह जमीन दोनों देशों के बीच तनाव का एक बड़ा केंद्र बनी हुई है।
अब क्यों सहमा हुआ है 'ड्रैगन'? भारत की सैन्य ताकत से बढ़ी टेंशन
हाल के वर्षों में भारत ने अपनी सीमाओं पर जिस तरह से बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास किया है, उससे चीन की नींद उड़ गई है। भारत ने लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास सड़क नेटवर्क, एडवांस एयरफील्ड, टनल और सामरिक डिपो का जाल बिछा दिया है। इसके अलावा, भारतीय सेना की मारक क्षमता और आधुनिक हथियारों की तैनाती ने उस इलाके में भारत की स्थिति को बेहद मजबूत कर दिया है। चीनी सेना (PLA) को अब यह डर सताने लगा है कि यदि भविष्य में कोई संघर्ष होता है, तो भारत अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने के लिए निर्णायक कार्रवाई कर सकता है। यही कारण है कि ड्रैगन उस इलाके में लगातार अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है, लेकिन अंदरूनी तौर पर उसे अपना यह अवैध कब्जा खिसकता हुआ दिखाई दे रहा है।
सीमा पर बदलता समीकरण और भारत का कड़ा रुख
भारत की वर्तमान विदेश और रक्षा नीति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारतीय सेना हर मोर्चे पर दुश्मन की हरकतों का माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। ड्रैगन द्वारा सीमावर्ती इलाकों में बनाए गए कृत्रिम गांवों और सैन्य अड्डों पर भी भारतीय खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर है। इतिहास के पन्नों में खोया हुआ वह टुकड़ा आज चीन के लिए फायदे का सौदा कम और एक रणनीतिक जाल ज्यादा बनता जा रहा है, जहाँ उसे हर वक्त भारत की रणनीतिक बढ़त का खौफ सता रहा है।