अरुणाचल सीमा पर भारत का अभेद्य किला, जानिए सियांग मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट से कैसे ध्वस्त होगी चीन की हर चाल?
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास पूर्वोत्तर के सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील राज्य अरुणाचल प्रदेश में भारत सरकार एक ऐसा अभेद्य और रणनीतिक किला तैयार करने जा रही है, जिससे ड्रैगन की हर कुटिल चाल और नापाक मंसूबों पर हमेशा के लिए पानी फेर दिया जाएगा। पूर्वोत्तर भारत के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गेमचेंजर साबित होने वाले इस मेगा प्रोजेक्ट का नाम 'सियांग मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' (Siang Multipurpose Project) है। ब्रह्मपुत्र नदी की मुख्य धारा यानी सियांग नदी पर बनने वाली इस विशालकाय जलविद्युत और बहुउद्देशीय परियोजना को केवल एक बिजली उत्पादन का साधन नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह भारत का एक ऐसा सामरिक और भू-राजनीतिक ब्रह्मास्त्र है जो युद्ध जैसे हालातों में चीन द्वारा भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले जल हथियारों (Water Weapons) और बाढ़ के खतरे को पूरी तरह बेअसर कर देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के रक्षा और ऊर्जा रणनीतिकारों ने इस प्रोजेक्ट के जरिए चीन की सीमा पर एक ऐसा सुरक्षा चक्रव्यूह रचने की तैयारी कर ली है, जिससे चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की नींद उड़ना तय माना जा रहा है।
आखिर क्यों सामरिक और रणनीतिक रूप से अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी बन चुकी है सबसे बड़ी जंग का अखाड़ा?
तिब्बत के ऊंचे glaciers से निकलकर भारत में प्रवेश करने वाली सियांग नदी (जिसे आगे चलकर असम में ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है) भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की जीवनरेखा है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने तिब्बत के ऊपरी इलाकों में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों पर बड़े-बड़े बांध (Super Dams) बनाने शुरू कर दिए हैं। बीजिंग का यह गुप्त और खतरनाक षड्यंत्र है कि वह इन बांधों के जरिए भारत की तरफ आने वाले पानी के प्राकृतिक बहाव को अचानक मोड़ सकता है या फिर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (विशेषकर अरुणाचल और असम) में अचानक कृत्रिम बाढ़ (Artificial Floods) लाकर तबाही मचा सकता है। चीन की इस 'वाटर टेररिज़्म' (Water Terrorism) की काट ढूंढने के लिए ही भारत सरकार ने सियांग नदी पर दुनिया के सबसे बड़े बांधों में से एक यानी सियांग अपर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने का मास्टरप्लान तैयार किया है। यह प्रोजेक्ट केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को ही पूरा नहीं करेगा, बल्कि चीन द्वारा सीमा पार से जल प्रवाह में किए जाने वाले किसी भी हेरफेर को रोकने के लिए एक विशाल बफर जोन का काम करेगा।
सियांग मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट का विशाल स्वरूप और लगभग 11 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का महालक्ष्य
सरकारी और सामरिक दस्तावेजों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले में बनने वाले इस मेगा प्रोजेक्ट की क्षमता लगभग 11,000 मेगावाट (11 GW) बिजली उत्पादन की होगी, जो इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में शुमार करती है। इस परियोजना के तहत नदी पर एक विशालकाय कंक्रीट बांध बनाया जाएगा, जिसमें भारी मात्रा में पानी को स्टोर करने की क्षमता होगी। जब पूर्वोत्तर या पड़ोसी देशों में भारी मानसूनी बारिश के दौरान पानी का स्तर अचानक बढ़ता है, तो यह विशाल जलाशय उस अतिरिक्त पानी को अपने भीतर रोक लेगा, जिससे नीचे के मैदानी इलाकों में कभी बाढ़ का खतरा पैदा नहीं होगा। इसके विपरीत, गर्मियों के सूखे दिनों में जब पानी की किल्लत होती है, तब इसी जलाशय से नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जाएगा, जिससे अरुणाचल और असम के किसानों को खेती के लिए सालभर भरपूर पानी मिलता रहेगा।
चीन के बांधों की हर चाल होगी फेल: जानिए कैसे भारत के इस वाटर शील्ड से कांपेगा बीजिंग
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि सियांग मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के बन जाने से तिब्बत की तरफ चीन द्वारा बनाए गए सुपर डैम्स का सामरिक महत्व लगभग शून्य हो जाएगा। अगर भविष्य में कभी चीन अपनी चालबाजी के तहत तिब्बत स्थित बांधों से अचानक लाखों क्यूसेक पानी भारत की तरफ छोड़ता है, तो सियांग प्रोजेक्ट का विशाल जलाशय उस भारी सैलाब को अपने अंदर सोख लेगा और भारतीय क्षेत्रों में एक बूंद भी नुकसान नहीं होने देगा। इसके अलावा, युद्ध की स्थिति में इस जलाशय के पास जल स्तर को नियंत्रित करने की जो क्षमता होगी, वह भारतीय वायुसेना (IAF) और थल सेना को सामरिक बढ़त प्रदान करेगी। अरुणाचल की दुर्गम पहाड़ियों में तैनात भारतीय सैनिकों और सैन्य वाहनों की आवाजाही के लिए बिजली और लॉजिस्टिक्स की आपूर्ति इस प्रोजेक्ट से निर्बाध रूप से मिलती रहेगी, जिससे भारत की रक्षा पंक्ति को अभेद्य मजबूती मिलेगी।
स्थानीय जनता का समर्थन, पर्यावरण संतुलन और पुनर्वास की दिशा में उठाए जा रहे ठोस कदम
इतने बड़े पैमाने पर बनने वाली किसी भी परियोजना के साथ पर्यावरणीय चिंताएं और स्थानीय लोगों के विस्थापन का मुद्दा जुड़ना स्वाभाविक होता है। सियांग प्रोजेक्ट को लेकर भी शुरुआत में कुछ स्थानीय संगठनों और आदि समुदाय के लोगों के मन में अपनी जमीन और संस्कृति खोने का डर था। हालांकि, केंद्र सरकार, राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) और अरुणाचल प्रदेश सरकार ने स्थानीय हितधारकों के साथ लगातार संवाद स्थापित कर उनकी हर आशंका को दूर करने का काम किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विस्थापित होने वाले परिवारों को उनकी कल्पना से बेहतर मुआवजा, आधुनिक पुनर्वास कॉलोनियां और रोजगार के सुनहरे अवसर दिए जाएंगे। इसके साथ ही, पर्यावरण विशेषज्ञों की निगरानी में इको-फ्रेंडली तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि हिमालयी क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को कोई नुकसान न पहुंचे।
पूर्वोत्तर भारत में आर्थिक समृद्धि और विकास के नए सूर्योदय का प्रतीक बनेगा सियांग प्रोजेक्ट
ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक मजबूती के अलावा सियांग मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश और पूरे पूर्वोत्तर के आर्थिक विकास की तकदीर बदलने वाला है। इस मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। सड़क संपर्क, सुरंगों का निर्माण, संचार नेटवर्क और पर्यटन के क्षेत्र में इस इलाके का ऐसा कायाकल्प होगा जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (Border Infrastructure) को मजबूत करने की दिशा में यह अब तक का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। ड्रैगन की हर विस्तारवादी और जल-कूटनीति (Hydro-diplomacy) को करारा जवाब देने के लिए भारत का यह अभेद्य किला तैयार हो रहा है, जो आने वाले दशकों में देश की संप्रभुता और सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल साबित होगा।