जज साहब के नाबालिग बेटा ने मर्सिडीज से स्कूटर सवार को कुचला; मिलॉर्ड पर थाने में हेकड़ी दिखाने का आरोप

जज साहब के नाबालिग बेटा ने मर्सिडीज से स्कूटर सवार को कुचला; मिलॉर्ड पर थाने में हेकड़ी दिखाने का आरोप

सड़क पर तेज रफ्तार लग्जरी गाड़ी और कानून की धज्जियां उड़ाती रसूखदारी का एक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। एक माननीय जज साहब के नाबालिग बेटे ने अपनी तेज रफ्तार लग्जरी मर्सिडीज कार से सड़क पर जा रहे एक बेकसूर स्कूटर सवार को रौंद दिया। भीषण टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कूटर के परखच्चे उड़ गए और पीड़ित जिंदगी व मौत के बीच झूल रहा है। दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस जब आरोपी और उसके परिवार को थाने लेकर आई, तो न्याय के रक्षक यानी जज साहब पर ही थाने के अंदर अपनी पावर और हेकड़ी दिखाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

रसूख की रफ्तार ने छीना गरीब का चैन, बेकाबू मर्सिडीज का खौफनाक तांडव

यह दर्दनाक हादसा देर रात उस वक्त हुआ जब एक आम नागरिक अपने स्कूटर से घर की ओर लौट रहा था। तभी अचानक पीछे से बेहद तेज गति में आ रही एक मर्सिडीज कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। चश्मदीदों के मुताबिक, लग्जरी गाड़ी की रफ्तार इतनी तेज थी कि ड्राइवर उस पर से अपना नियंत्रण पूरी तरह खो बैठा था। टक्कर के बाद पीड़ित कई फीट हवा में उछलकर सड़क पर गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। कार कोई और नहीं बल्कि एक वरिष्ठ जज साहब का नाबालिग बेटा चला रहा था, जो बिना ड्राइविंग लाइसेंस के सड़क पर यह जानलेवा फर्राटा भर रहा था।

थाने में कानून की धौंस और पुलिसकर्मियों पर दबाव बनाने का आरोप

हादसे के बाद जब स्थानीय लोगों ने कार को घेरकर पुलिस को सूचना दी, तो आरोपी को थाने लाया गया। आरोप है कि घटना की भनक लगते ही जज साहब खुद अपने लाव-लश्कर के साथ थाने पहुंचे और वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर रोब झाड़ना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों का दावा है कि थाने परिसर के अंदर खाकी वर्दी पर न्यायपालिका के पद का भारी दबाव बनाने की कोशिश की गई ताकि मामले को दबाया जा सके या इसे एक साधारण एक्सीडेंट का रूप दिया जा सके।

वीआईपी कल्चर और नाबालिगों के हाथ में स्टेयरिंग पर जनता का फूटा गुस्सा

इस खौफनाक घटना के बाद से ही आम जनता और पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही अपने नाबालिग बच्चों को लग्जरी गाड़ियां थमाकर सड़क पर मौत बांटने की छूट देंगे, तो आम नागरिक कहां सुरक्षित रहेगा। स्थानीय लोगों ने थाने के बाहर जमकर हंगामा किया और आरोपी नाबालिग के साथ-साथ उसके अभिभावक पर भी सख्त धाराओं में केस दर्ज करने की मांग की।

क्या न्याय के तराजू में बराबर आ पाएगा पीड़ित? उठ रहे कई तीखे सवाल

पुलिस ने इस पूरे मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक जज के बेटे के खिलाफ निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो पाएगी? सड़क हादसे में जिंदगी की जंग लड़ रहे पीड़ित के परिजन इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस वीआईपी दबाव के आगे झुकता है या फिर पीड़ित परिवार को कानून के मुताबिक सही और कड़ा न्याय दिला पाता है।