पेट्रोल पर ₹10.6 और डीजल पर ₹18.4 का नुकसान, जानिए क्यों कंगाल हो रही हैं सरकारी तेल कंपनियां

पेट्रोल पर ₹10.6 और डीजल पर ₹18.4 का नुकसान, जानिए क्यों कंगाल हो रही हैं सरकारी तेल कंपनियां

अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ सैन्य तनाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा। इसका असर दुनिया के ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया। भारत में भी हालात चुनौतीपूर्ण रहे। हालांकि सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी कम कर दी।

युद्ध लंबा खिंचने के दौरान सरकारी तेल कंपनियों ने चार चरणों में पेट्रोल और डीजल की कीमत कुल 7 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई। बाद में जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू हुआ तो कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। इसके बाद लोगों ने ईंधन के दाम कम करने की मांग तेज कर दी।

सीजफायर टूटते ही फिर बढ़ी कच्चे तेल की कीमत

राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम समझौता टूट गया और अमेरिका ने ईरान पर फिर मिसाइल हमले शुरू कर दिए। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल दोबारा महंगा हो गया और इसकी कीमत बढ़कर लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।

इस बीच सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी BPCL के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून तिमाही बेहद कठिन साबित हुई। पेट्रोल की कीमत बढ़ने के बावजूद कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

कीमतों पर नियंत्रण बना नुकसान की बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ा कारण सरकार की मूल्य नियंत्रण व्यवस्था रही। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से कच्चे तेल की कीमत 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई थी। इसके बावजूद BPCL, इंडियन ऑयल और HPCL जैसी सरकारी कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए। बाद में मई की शुरुआत में कुल 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी ने बढ़ाई मुश्किलें

रिफाइनिंग कारोबार से कंपनी को कुछ फायदा जरूर मिला लेकिन ईंधन की खुदरा बिक्री में नुकसान ने उस लाभ को काफी हद तक खत्म कर दिया। बाजार के जानकारों के मुताबिक इस तिमाही में पेट्रोल पर औसत मार्केटिंग मार्जिन माइनस 10.6 रुपये प्रति लीटर रहा। वहीं डीजल पर यह माइनस 18.4 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया। यानी कंपनी लागत के मुकाबले काफी कम कमाई कर रही थी।

एलपीजी के 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी भी लागत के हिसाब से पर्याप्त नहीं रही। इसका असर भी कंपनी के मुनाफे पर पड़ा।

Latest Posts