संसद में आज से महाभारत: बदली हुई सीटों और 5 नए बिलों के बीच शुरू हुआ मानसून सत्र, पहले दिन ही भारी हंगामे के पूरे आसार

संसद में आज से महाभारत: बदली हुई सीटों और 5 नए बिलों के बीच शुरू हुआ मानसून सत्र, पहले दिन ही भारी हंगामे के पूरे आसार

भारतीय संसद के गलियारों में आज से एक बार फिर सियासी संग्राम यानी 'महाभारत' का आगाज हो चुका है। संसद का बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र (Monsoon Session) आज से शुरू हो गया है। एक तरफ जहां संसद भवन के अंदर नए और बदले हुए सीटिंग अरेंजमेंट (सीटों की व्यवस्था) ने राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दिया है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के एजेंडे में शामिल 5 नए विधायी बिलों को लेकर सदन के भीतर और बाहर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सत्र के पहले ही दिन से दोनों सदनों में तीखी नोकझोंक और भारी हंगामे के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।

संसद में बदली हुई सीटें और नया सियासी नजारा

इस बार का सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक और अलग है। लोकसभा और राज्यसभा के भीतर सांसदों की बैठने की व्यवस्था (Seating Arrangement) में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हालिया राजनीतिक समीकरणों, दलों की संख्या और नए चेहरों के हिसाब से सांसदों को नई सीटें आवंटित की गई हैं। सदन के अंदर इस बदली हुई व्यवस्था के साथ जब सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे, तो दृश्य काफी बदला हुआ नजर आएगा।

सरकार के एजेंडे में 5 नए अहम बिल

संसद के इस मानसून सत्र के दौरान सरकार का मुख्य फोकस विधायी कार्यों पर है। सत्र की शुरुआत के साथ ही पटल पर 5 नए और बेहद महत्वपूर्ण बिल रखे जाने की पूरी तैयारी है। इन विधेयकों में देश के आर्थिक सुधारों, प्रशासनिक सुधारों और जनता से जुड़े कई अहम नीतिगत फैसले शामिल हैं। हालांकि, विपक्ष इन बिलों पर सरकार को घेरने और सदन की गरिमा के नाम पर तीखा विरोध दर्ज कराने की पूरी रणनीति बना चुका है।

पहले दिन ही हंगामे के आसार क्यों?

सत्र के पहले दिन से ही कार्यवाही के शांतिपूर्ण चलने की उम्मीद बेहद कम है। विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की पूरी तैयारी कर ली है। वहीं, सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हर हमले का आक्रामक जवाब देने के लिए तैयार बैठा है। विपक्षी दलों के तीखे तेवरों को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र का आगाज ही जबरदस्त हंगामे और बहसों के साथ होगा। देखना यह होगा कि कड़े विरोध के बीच सरकार अपने विधायी कार्यों को सदन में कैसे आगे बढ़ाती है।

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