धनतेरस पर 10,000 में कितना सोना मिलेगा; ज्वेलरी, सिक्का या डिजिटल गोल्ड, जानें कहां मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

धनतेरस पर 10,000 में कितना सोना मिलेगा; ज्वेलरी, सिक्का या डिजिटल गोल्ड, जानें कहां मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदना भारतीय परंपरा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है, लेकिन अगर आपका बजट 10,000 रुपये है तो आपके हाथ में कितना असली सोना आएगा, यह इस बात पर तय होता है कि आप खरीदारी का कौन सा जरिया चुनते हैं। मौजूदा समय में 24-कैरेट सोना लगभग 14,150 रुपये प्रति ग्राम और 22-कैरेट सोना 13,490 रुपये प्रति ग्राम के आसपास बना हुआ है। ऐसे में उसी 10,000 रुपये की रकम से आभूषण, सोने का सिक्का या डिजिटल गोल्ड खरीदने पर शुद्ध सोने की मात्रा और आपकी जेब पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलता है।

अगर आप 10,000 रुपये में 22-कैरेट सोने के आभूषण लेते हैं, तो लगभग 15 फीसदी मेकिंग चार्ज (करीब ₹1,270) और 3 फीसदी जीएसटी (लगभग ₹290) कटने के बाद केवल 8,440 रुपये का ही वास्तविक सोना मिल पाता है, यानी आपके हाथ में सिर्फ 0.63 ग्राम आभूषण (0.58 ग्राम शुद्ध सोना) आएगा। वहीं 24-कैरेट में 0.5 ग्राम का सिक्का लेने पर मिंटिंग चार्ज और टैक्स कटने के बाद लगभग 7,075 रुपये खर्च होंगे और बाकी बची रकम सिक्के के फिक्स्ड साइज होने के कारण बच जाएगी। इसके उलट डिजिटल गोल्ड में कोई मेकिंग या मिंटिंग चार्ज नहीं लगता, जहां 3 फीसदी जीएसटी कटने के बाद लगभग 9,710 रुपये सीधे 24-कैरेट सोने में तब्दील हो जाते हैं और आपको करीब 0.69 ग्राम शुद्ध सोना मिल जाता है। बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार, आभूषणों में डिजाइन और कारीगरी के चलते सबसे ज्यादा एक्स्ट्रा चार्ज लगता है, जबकि डिजिटल सोना आपके अधिकतम पैसे को सीधे धातु में बदल देता है।

सोने की असली परख उसे बेचते समय होती है, जहां रिटर्न का गणित पूरी तरह बदल जाता है। यदि आप 10,000 रुपये के आभूषण को तुरंत बेचने जाएं, तो मेकिंग चार्ज और टैक्स का नुकसान होने के साथ-साथ ज्वेलर की कटौती के बाद आपको करीब 8,000 रुपये ही वापस मिलेंगे, जो सीधे तौर पर 20 फीसदी तक का नुकसान है। सिक्कों पर बायबैक की स्थिति बेहतर रहती है, हालांकि ज्वेलर या बैंक की अपनी शर्तें लागू होती हैं। डिजिटल सोने को यदि तुरंत बेचा जाए तो 3 से 5 फीसदी के स्प्रेड और जीएसटी कटौती के बाद लगभग 9,300 से 9,500 रुपये हाथ में आते हैं। टैक्स नियमों की बात करें तो सोने को दो साल से ज्यादा रखने के बाद बेचने पर मुनाफे पर 12.5 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स लगता है, जबकि दो साल से पहले बेचने पर मुनाफा आपकी आय में जुड़कर टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स के दायरे में आता है। साथ ही डिजिटल गोल्ड फिलहाल सेबी या आरबीआई के सीधे नियमन के दायरे से बाहर है, इसलिए ऑथराइज्ड प्लेटफॉर्म से ही खरीदारी करें।

अगर आपका मकसद सिर्फ शादी-ब्याह, त्योहार में पहनना या किसी को उपहार देना है, तो बीआईएस हॉलमार्क वाली ज्वेलरी ही सबसे मुफीद विकल्प है। लेकिन अगर आप सिर्फ निवेश या बचत के नजरिए से सोना खरीद रहे हैं, तो कम बजट में डिजिटल गोल्ड और फिजिकल रूप में रखने के लिए सोने के सिक्के सबसे बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करते हैं। किसी भी विकल्प को चुनने से पहले मेकिंग चार्ज, सेलिंग स्प्रेड और बिल पर हॉलमार्किंग की जांच जरूर कर लें।