पंजाब में समय से पहले लगे आचार संहिता! सुनील जाखड़ ने राज्यपाल को चिट्ठी लिख मान सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पंजाब की सियासत में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घमासान तेज हो गया है। प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए राज्यपाल को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। जाखड़ ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे भारतीय चुनाव आयोग से राज्य में तय समय से पहले ही आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू करने की सिफारिश करें, ताकि मौजूदा माहौल में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित हो सके।
भाजपा नेता ने अपने पत्र में अबोहर की वार्षिक नशा विरोधी मैराथन का विशेष उल्लेख किया, जिसे स्थानीय प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था। जाखड़ का कहना है कि प्रशासन ने लिखित आदेश में खुद स्वीकार किया है कि हालात अनुकूल नहीं हैं, जो सरकार की नाकामी का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमृतसर, तरनतारन, खेमकरण, गुरदासपुर, हरगोबिंदपुर, मानसा, अबोहर, संगरूर और लुधियाना समेत राज्य के कई जिलों में आपराधिक घटनाओं के चलते आम अवाम दहशत के साए में जीने को मजबूर है।
जाखड़ ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को खुलेआम धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पुलिस कई मामलों में पीड़ितों पर ही दबाव बना रही है। प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में अहम पदों पर नियुक्तियां राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए की जा रही हैं और जेलों के भीतर से हथियार व नशा तस्करी के सिंडिकेट संचालित हो रहे हैं। इस पूरे नेक्सस की जांच के लिए वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पहले ही एनआईए जांच की मांग कर चुके हैं।
सुनील जाखड़ ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पंजाब एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है और यहां पनप रहा भय का वातावरण आने वाले विधानसभा चुनावों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह बेपटरी कर सकता है। समय रहते कदम न उठाए गए तो मतदान तक हालात काबू से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने राज्यपाल से संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जल्द से जल्द चुनाव आयोग के जरिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाने और आचार संहिता लागू करवाने का अनुरोध किया है, ताकि मतदाता बिना किसी खौफ के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।