पहलगाम के आतंकियों के मोबाइल ने उगले सनसनीखेज राज, चीन से कराची होते हुए कश्मीर पहुंचे फोन, पाकिस्तानी बैंक से जुड़ा कनेक्शन
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है। मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के पास से बरामद हुए दो मोबाइल फोन ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। जांच में सामने आया है कि इन फोनों का सीधा कनेक्शन पाकिस्तान के एक ऐसे बैंक से है, जिसका नाम अंतरराष्ट्रीय आतंकी फंडिंग में पहले भी आ चुका है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन स्मार्टफोनों को चीन से मंगाने के बाद करीब दो साल तक जानबूझकर बंद रखा गया था और कश्मीर में आतंकी हमले को अंजाम देने से ठीक पहले ही इन्हें एक्टिवेट किया गया था।
चीन से आया था कंसाइनमेंट, कराची का बैंक था डिलीवरी एड्रेस
सुरक्षा एजेंसियों और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त जांच में यह साफ हो गया है कि आतंकियों के पास से जो दो स्मार्टफोन मिले थे, वे रेडमी सीरीज के शाओमी (Xiaomi) फोन हैं। इनमें से एक रेडमी 9टी (ऑरेंज) और दूसरा रेडमी नोट 12 (ब्लैक) मॉडल है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, रेडमी 9टी फोन जिस बड़े कंसाइनमेंट का हिस्सा था, उसे जनवरी 2021 में चीन से पाकिस्तान आयात किया गया था। इसे कराची की 'टेक सिरत प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी ने मंगवाया था, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस कंसाइनमेंट के लिए लिस्टेड लॉजिस्टिक पार्टनर और डिलीवरी एड्रेस कराची स्थित 'फैसल बैंक' का मुख्य कार्यालय था। आशंका जताई जा रही है कि आतंकियों के लिए चीन से फोन मंगवाने की इस पूरी खेप की फंडिंग इसी पाकिस्तानी बैंक के जरिए की गई थी।
दो साल तक सीक्रेट प्लान के तहत स्लीपिंग मोड में रखे गए फोन
जांचकर्ताओं को सबसे बड़ा सुराग फोन के एक्टिवेशन पैटर्न से मिला है। वर्ष 2021 में पाकिस्तान पहुंचने के बाद इन स्मार्टफोनों को 2023 में आतंकियों के आकाओं द्वारा खरीदा गया। इसके बाद एक सोची-समझी साजिश के तहत दोनों मोबाइलों को दो साल तक पूरी तरह बंद यानी स्लीपिंग मोड में रखा गया ताकि भारतीय खुफिया एजेंसियों की रडार पर ये न आ सकें। इसके बाद 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से ठीक पहले इन फोनों को अचानक एक्टिवेट किया गया। इस टाइमलाइन से साफ है कि इन फोनों को खरीदते वक्त ही कश्मीर में किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया था, जिसे बाद में स्मगलिंग के रास्ते लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक पहुंचाया गया।
9/11 हमले और अल-कायदा से जुड़ा है इस पाकिस्तानी बैंक का इतिहास
भले ही फैसल बैंक का पहलगाम हमले से सीधे तौर पर कोई आधिकारिक संबंध सामने न आया हो, लेकिन आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद देने में इसका इतिहास बेहद दागदार रहा है। साल 2007 में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक अंतरराष्ट्रीय खोजी रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि अमेरिका में 9/11 के आत्मघाती आतंकी हमले के बाद जब अदालत में दस्तावेज पेश किए गए, तो पता चला कि वैश्विक स्तर पर आतंक का समर्थन करने वाले दो बड़े संगठनों के बैंक खाते इसी फैसल बैंक में एक्टिव थे। इन संगठनों में भारत का गुनहगार लश्कर-ए-तैयबा और अल-कायदा से सीधा लिंक रखने वाला खतरनाक आतंकी गुट 'लाजनात अल दवा' शामिल हैं।
दचिगाम मुठभेड़ में मारे गए थे फोन इस्तेमाल करने वाले तीनों खूंखार आतंकी
सुरक्षा बलों ने 28 जुलाई 2025 को दचिगाम के मुलनार महादेव वन्यजीव क्षेत्र में एक बड़े ऑपरेशन के दौरान लश्कर के तीन बेहद खतरनाक पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर कर दिया था। मारे गए इन आतंकियों की पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई थी। सुरक्षा बलों को इन तीनों के शवों के पास से ही ये दोनों रेडमी स्मार्टफोन बरामद हुए थे। अब एनआईए इन फोनों के डेटा को रिकवर कर कश्मीर में सक्रिय उनके अन्य लोकल मददगारों और ओवर ग्राउंड वर्करों (OGWs) के नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है।