Monsoon 2026: उत्तर भारत में उमस का टॉर्चर, कर्नाटक में सूखे की आहट तो पहाड़ों में आफत की बारिश; आखिर क्यों रूठ गया मॉनसून?

Monsoon 2026: उत्तर भारत में उमस का टॉर्चर, कर्नाटक में सूखे की आहट तो पहाड़ों में आफत की बारिश; आखिर क्यों रूठ गया मॉनसून?

जून के शुरुआती हफ्तों में केरल के रास्ते तेजी से एंट्री मारने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon 2026) की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से मौसम के बेहद विरोधाभासी और डराने वाले रूप सामने आ रहे हैं।

जहां उत्तर और मध्य भारत के लोग उमस और चिपचिपी गर्मी से बेहाल हैं, वहीं दक्षिण भारत के कर्नाटक जैसे राज्यों में बारिश न होने से सूखे (Drought) जैसे हालात बन गए हैं। दूसरी तरफ, पहाड़ी राज्यों (उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश (झमाझम बारिश) के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। आखिर मॉनसून के इस असंतुलित मिजाज के पीछे की वैज्ञानिक वजह क्या है और यह देश के कुछ हिस्सों से क्यों रूठ गया है?

1. अल नीनो (El Niño) का गहराता साया

इस साल मॉनसून के कमजोर पड़ने और देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की कमी का सबसे बड़ा विलेन अल नीनो (El Niño) को माना जा रहा है।

  • प्रशांत महासागर की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की इस घटना (El Niño Conditions) के मजबूत होने के कारण भारत की तरफ आने वाली मॉनसूनी हवाएं बेहद कमजोर पड़ गई हैं।

  • भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अल नीनो के इस प्रभाव के कारण जुलाई 2026 में देश भर में सामान्य से कम (Below Normal) बारिश होने की आशंका है।

2. कमजोर 'क्रॉस-इक्वेटोरियल' हवाएं और ठप पड़ा सिस्टम

मॉनसून की बारिश के लिए हिंद महासागर और अरब सागर से उठने वाली नमी से भरी तेज हवाओं का भारतीय उपमहाद्वीप की तरफ बहना जरूरी होता है। लेकिन इस साल:

  • कमजोर हवाएं (Weak Cross-Equatorial Flow): भूमध्य रेखा को पार करके भारत आने वाली दक्षिणी हवाएं काफी सुस्त हैं।

  • कम दबाव के क्षेत्रों की कमी: बंगाल की खाड़ी में मॉनसूनी हवाओं को आगे खींचने वाले मजबूत कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Systems) नहीं बन पा रहे हैं। इस वजह से मॉनसून मैदानी और प्रायद्वीपीय भारत में आगे बढ़ने के बजाय एक ही जगह ठहर (Stall) गया है।

3. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) का अड़ंगा

आमतौर पर मार्च-अप्रैल तक कमजोर हो जाने वाले पश्चिमी विक्षोभ (हवा के ठंडे झोंके जो भूमध्य सागर से आते हैं) इस साल जून और जुलाई के महीनों में भी उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय बने हुए हैं।

  • पहाड़ों में तो इनके कारण तेज बारिश और बर्फबारी हो रही है, लेकिन मैदानी इलाकों में ये मॉनसूनी हवाओं को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। यह स्थिति पहाड़ों और मैदानों के बीच 'टग ऑफ वॉर' (खींचतान) जैसी बन गई है, जिससे मैदानी इलाकों में केवल उमस बढ़ रही है और बारिश गायब है।

4. कर्नाटक और दक्षिण भारत में सूखे जैसे हालात

कर्नाटक और महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों में जून के बाद से ही बारिश की भारी किल्लत देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण अरब सागर की शाखा का कमजोर पड़ना है। मॉनसूनी हवाएं तटीय इलाकों को तो भिगो रही हैं, लेकिन पश्चिमी घाट (Western Ghats) को पार करके अंदरूनी पठारी इलाकों (जैसे उत्तर और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक) तक नहीं पहुंच पा रही हैं। जलाशयों में गिरता जलस्तर अब फसलों की बुवाई और पीने के पानी के संकट को बढ़ा रहा है।

कब मिलेगी इस उमस और सूखे से राहत?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जुलाई के दूसरे पखवाड़े (18 से 20 जुलाई के बाद) में उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने की उम्मीद है। हालांकि, अल नीनो के असर के कारण इस साल बारिश का वितरण (Distribution) बेहद असमान रहने वाला है। किसानों और आम लोगों को इस सीजन में पानी के समझदारी से उपयोग और संरक्षण की सलाह दी जा रही है।

Latest Posts