'मुनीर वो चपरासी जो कलेक्टर दफ्तर के बाहर खड़ा रहता है', कर्नल साहब ने तो पाक आर्मी के चीफ की धोती ही खींच ली
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी सामरिक खींचतान और जुबानी जंग के बीच एक बेहद तीखी, सनसनीखेज और चर्चित खबर सामने आई है। भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त कर्नल (पूर्व सैन्य अधिकारी) ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर अब तक का सबसे तीखा, अपमानजनक और करारा हमला बोला है। एक समाचार कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त कर्नल ने पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख की औकात और उनकी कार्यशैली की तुलना एक मामूली चपरासी से कर डाली। उन्होंने दो टूक कहा कि 'असीम मुनीर तो उस चपरासी की तरह हैं जो कलेक्टर दफ्तर के बाहर खड़ा रहता है।' पूर्व सैन्य अधिकारी के इस बेबाक और करारे बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो गया है। भारतीय रक्षा विशेषज्ञों और देश की जनता ने जहां इस बयान को पाकिस्तान की असलियत दिखाने वाला बताया है, वहीं पाकिस्तानी सैन्य हलकों में इस टिप्पणी से भारी खलबली और मिर्ची मच गई है।
पूर्व भारतीय कर्नल का कड़ा प्रहार: 'कलेक्टर के दफ्तर का चपरासी हैं असीम मुनीर'
एक टीवी डिबेट और सार्वजनिक चर्चा के दौरान जब पाकिस्तानी सेना के आक्रामक बयानों और वहां के आर्थिक संकट पर बात हो रही थी, तब पूर्व भारतीय कर्नल ने बिना किसी झिझक के पाक आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर की साख की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसी जिले में कलेक्टर का हुक्म चलता है और बाहर खड़ा चपरासी केवल दरवाजे खोलने व जी-हुजूरी करने का काम करता है, ठीक वही स्थिति आज पाकिस्तान में असीम मुनीर की है। पाकिस्तान की सेना और उसके जनरल केवल वैश्विक ताकतों (जैसे अमेरिका या चीन) के आगे हाजिरी लगाने और अपने मुल्क की संप्रभुता का सौदा करने का काम करते हैं। इस तीखी उपमा ने पाकिस्तानी सेना के उस गुब्बारे की हवा निकाल दी है जो खुद को पाकिस्तान का भाग्यविधाता समझती है।
पाकिस्तानी सेना की साख और असीम मुनीर की नीतियों पर खड़े किए गंभीर सवाल
पूर्व सैन्य अधिकारी ने अपने बयान में पाकिस्तानी सेना के उस दोहरे रवैये को उजागर किया जो दशकों से वहां की जनता को गुमराह करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि असीम मुनीर के पास अपने देश की बदहाल अर्थव्यवस्था, बिजली-पानी के भयंकर संकट और बलूचिस्तान में जारी उग्रवाद को रोकने का कोई विजन नहीं है। पाक आर्मी चीफ का पूरा ध्यान सिर्फ अपने पद को बचाने, विपक्ष का दमन करने और विदेशी ताकतों से आर्थिक मदद की भीख मांगने तक सीमित रह गया है। जब कोई सेना प्रमुख अपने ही नागरिकों के कल्याण के बजाय केवल सत्ता के दरवाजे पर पहरेदारी करने लगे, तो उसकी हैसियत किसी कलेक्टर दफ्तर के बाहर खड़े चपरासी से ज्यादा कुछ नहीं रह जाती।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, भारत में लोगों ने जमकर की तारीफ
पूर्व कर्नल साहब का यह बेबाक अंदाज और बयान का वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर), यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर तेजी से ट्रेंड करने लगा है। भारतीय यूजर्स इस बयान को खूब शेयर कर रहे हैं और पूर्व कर्नल के निडर रुख की जमकर तारीफ कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी सेनाध्यक्षों की जमीनी हकीकत को इस तरह साफ और खरी-खुरी भाषा में उजागर करना बेहद जरूरी था। वहीं, भारतीय रक्षा प्रेमियों का मानना है कि यह बयान न केवल पाकिस्तानी जनरलों के अहंकार पर एक करारा तमाचा है, बल्कि यह पाकिस्तान की अंदरूनी प्रशासनिक और आर्थिक लाचारी का बिल्कुल सटीक दर्पण भी प्रस्तुत करता है।
पाकिस्तानी मीडिया और रक्षा गलियारों में मचा हड़कंप, उड़े होश
भारतीय पूर्व कर्नल की इस तीखी टिप्पणी के बाद पाकिस्तान के मुख्यधारा के मीडिया, रक्षा विश्लेषकों और यूट्यूब चैनलों पर रोष और खलबली का माहौल है। पाकिस्तानी डिबेट्स में भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी के इस बयान की दिन-रात चर्चा हो रही है। पाकिस्तानी एंकर्स इस बात से बौखलाए हुए नजर आ रहे हैं कि कैसे एक भारतीय कर्नल ने उनके सेना प्रमुख की तुलना चपरासी से कर दी। हालांकि, पाकिस्तान के कई आम नागरिक और स्वतंत्र पत्रकार भी दबी जुबान में यह स्वीकार कर रहे हैं कि देश के जनरल सच में अपनी पेशेवर जिम्मेदारी भूलकर देश को कंगाली और बदहाली की ओर धकेल रहे हैं, जिससे उनकी वैश्विक छवि पूरी तरह से खराब हो चुकी है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों और पाकिस्तानी सेना के भविष्य पर क्या पड़ेगा असर?
यह बयान केवल एक जुबानी जंग नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के भीतर सेना के गिरते जनाधार और वैश्विक स्तर पर उसकी साख के खत्म होने का बड़ा संकेत है। भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार केवल नाममात्र की है और असली डोर रावलपिंडी (सैन्य मुख्यालय) के पास है। लेकिन जब सैन्य नेतृत्व ही अपनी दिशा खो दे और केवल बाहरी मदद के भरोसे टिके, तो ऐसी सेना देश की रक्षा करने में पूरी तरह नाकाम साबित होती है। पूर्व कर्नल के इस विस्फोटक बयान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय रक्षा बल न केवल सीमा पर बल्कि वैचारिक और कूटनीतिक मंचों पर भी पाकिस्तान के हर अनर्गल प्रहार का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमेशा तत्पर हैं।