तिहाड़ जेल में नफे सिंह की हुई मौत, मंजीत महल गैंग का था गुर्गा, सामने आई जान जाने की वजह
दिल्ली की हाई-सिक्योरिटी तिहाड़ जेल से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। कुख्यात गैंगस्टर मंजीत महल गिरोह के सक्रिय और बेहद खतरनाक गुर्गे नफे सिंह उर्फ नफे की जेल परिसर के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। दिल्ली-एनसीआर के जघन्य अपराधों, रंगदारी, हत्या के प्रयासों और संगठित अपराधों में संलिप्त इस शातिर अपराधी की अचानक हुई मौत के बाद जेल प्रशासन और राजधानी के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं, वहीं शुरुआती रिपोर्टों में नफे सिंह की मौत के पीछे की मुख्य वजह भी सामने आ चुकी है।
तिहाड़ के हाई-सिक्योरिटी वार्ड में हड़कंप और सुरक्षा चक्र पर खड़े होते गंभीर सवाल
राजधानी दिल्ली के नजफगढ़ और आसपास के इलाकों में अपने खौफ के लिए जाना जाने वाला नफे सिंह लंबे समय से तिहाड़ जेल परिसर में बंद था। वह गैंगस्टर मंजीत महल के नेटवर्क का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था और जेल के अंदर से ही गैंग की गतिविधियों को अंजाम देने में मदद करता था। बीते दिन अचानक नफे सिंह की बैरक में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। जेल के मेडिकल स्टाफ ने शुरुआती जांच के बाद उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए तुरंत डीडीयू (दीन दयाल उपाध्याय) अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने तिहाड़ जेल प्रशासन की चौकसी और कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
क्या थी नफे सिंह की जान जाने की असली वजह? पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
नफे सिंह की अचानक मौत को लेकर शुरुआत में गैंगवार या किसी अंदरूनी रंजिश की अफवाहें उड़ने लगी थीं, लेकिन प्राथमिक जांच और जेल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उसकी जान जाने की मुख्य वजह अचानक आया हार्ट अटैक (हृदयघात) बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि उसे सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके तुरंत बाद वह बेहोश होकर गिर पड़ा। हालांकि, मौत के सही कारणों की आधिकारिक और शत-प्रतिशत पुष्टि के लिए शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के एक विशेष पैनल द्वारा कराया जा रहा है, जिसकी वीडियोग्राफी भी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मजिस्ट्रेट जांच पूरी होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का पूरा सच सामने आ पाएगा।
मंजीत महल गैंग और नजफगढ़ क्षेत्र में नफे सिंह का बढ़ता आपराधिक नेटवर्क
नफे सिंह पश्चिमी दिल्ली और हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय मंजीत महल गिरोह की रीढ़ माना जाता था। उस पर रंगदारी वसूली, जमीनों पर अवैध कब्जे, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत दर्जनों संगीन मुकदमे दर्ज थे। कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग और मंजीत महल गैंग के बीच पिछले कई सालों से चली आ रही खूनी जंग में नफे सिंह का नाम कई बार अग्रिम पंक्ति में आया था। जेल के अंदर बंद रहने के बावजूद वह अपने गुर्गों के संपर्क में रहता था और क्षेत्र के व्यापारियों में उसका भारी खौफ था। उसकी मौत के बाद दिल्ली पुलिस का स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच अलर्ट पर है ताकि गैंगवार की किसी भी नई आशंका को समय रहते रोका जा सके।
न्यायिक जांच के आदेश और तिहाड़ प्रशासन की सख्त कानूनी कार्रवाई
हिरासत में हुई इस मौत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के तय मानकों के अनुसार मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की निगरानी में न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच टीम बैरक के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और घटना के वक्त नफे सिंह के साथ मौजूद अन्य कैदियों व ड्यूटी पर तैनात जेल कर्मियों के बयान दर्ज कर रही है। जेल प्रशासन यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि कहीं इस घटना में कोई साजिश या लापरवाही तो शामिल नहीं थी। नफे सिंह के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है।