NEET Paper Leak: PM मोदी के ऐलान के तुरंत बाद राहुल गांधी का सीधा हमला, सरकार के सामने रख दीं ये 3 बड़ी शर्तें!
NEET परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में जारी बवाल के बीच राजनीतिक घमासान और तेज़ हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दोषियों को सजा दिलाने के लिए 'फास्ट ट्रैक कोर्ट' (त्वरित अदालतें) बनाने के ऐलान के तुरंत बाद, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उन पर सीधा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सरकार पर युवाओं के भविष्य को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
"शिक्षा प्रणाली पर कब्जा कर उसे नष्ट किया गया"
राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक 'X' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि केंद्र सरकार की नीतियों ने देश के शिक्षा ढांचे को खोखला कर दिया है।
राहुल गांधी का सीधा आरोप: "हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान आपने ही पहुंचाया है। आपने हमारी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से अपने कब्जे में लेने और उसे नष्ट करने की अनुमति दी और बढ़ावा दिया—और इसके लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।"
विपक्ष के नेता ने रखीं सरकार के सामने 3 बड़ी मांगें
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शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद से हटाया जाए।
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सार्वजनिक माफी: प्रधानमंत्री और सरकार देश के लाखों पीड़ित छात्रों से माफी मांगें।
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दोषियों पर कार्रवाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हमला करने और उन पर मुकदमे दर्ज करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट के ऐलान के बाद गरमाई राजनीति
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कड़ा संदेश जारी करते हुए कहा था कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द से जल्द न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जा रहा है। पीएम ने स्पष्ट किया था कि संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में सख्त कदम उठाने के निर्देश दे दिए गए हैं।
हालांकि, 20 जून से जारी छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र जवाबदेही तय करने, शिक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक का अनशन जारी
पर्यावरणविद् और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो 28 जून से इस आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, की स्थिति को देखते हुए उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है।
अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्होंने रुख साफ करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार यह लिखित आश्वासन दे दे कि विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई या FIR दर्ज नहीं की जाएगी, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।