CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आज जंतर-मंतर पर बड़ा हल्ला बोल

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आज जंतर-मंतर पर बड़ा हल्ला बोल

भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों उठापटक और तीखे टकराव का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है, और इसी कड़ी में आज देश की राजधानी नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक बहुत बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिलने वाला है। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ विपक्षी दलों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए आज जोरदार हल्ला बोल करने की पूरी तैयारी कर ली है। संसद के सत्र से लेकर सड़क तक सरकार और संवैधानिक संस्थाओं को घेरने की रणनीति के तहत विपक्ष ने आज जंतर-मंतर पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन बुलाया है। इस विरोध प्रदर्शन की कमान खुद देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संभाल रहे हैं, जिनके साथ इंडिया अलायंस के तमाम दिग्गज नेता और देश भर से आए सैकड़ों सांसद कंधे से कंधा मिलाकर सड़क पर उतरेंगे। इस प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने भी जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए हैं ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह से नियंत्रण में बनी रहे और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के तीखे तेवर और गंभीर आरोप

आखिर ऐसा क्या कारण है कि विपक्ष को सीधे देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़क पर उतरकर इस तरह का उग्र प्रदर्शन करना पड़ रहा है? विपक्षी दलों का यह साफ तौर पर आरोप है कि चुनाव आयोग जैसी देश की सर्वोच्च और निष्पक्ष संवैधानिक संस्था पिछले कुछ समय से निष्पक्षता के मार्ग से भटक गई है और सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम कर रही है। विपक्ष का दावा है कि चुनाव प्रक्रियाओं, मतदाता सूचियों के प्रबंधन, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की पारदर्शिता और चुनावी आचार संहिता के पालन जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार औपचारिक रूप से चुनाव आयोग के सामने अपनी शिकायतें और मांगें रखी हैं, लेकिन उनकी आवाज़ को लगातार अनसुना किया जा रहा है, जिसके कारण उनके पास अब लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरकर जनता के बीच अपनी बात रखने और सरकार व आयोग पर दबाव बनाने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। इस तीखे टकराव के कारण एक बार फिर से सरकार और चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर देश भर में एक बहुत बड़ी बहस छिड़ गई है।

मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की अगुवाई में सांसदों का शक्ति प्रदर्शन

आज जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले इस विरोध प्रदर्शन को केवल एक आम धरना नहीं बल्कि विपक्ष के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी मुख्य आकर्षण और वक्ता होंगे। इन दोनों शीर्ष नेताओं के नेतृत्व में देश के कोने-कोने से आए सांसद और विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता केंद्र सरकार की नीतियों और चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकालेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष न केवल आगामी राजनीतिक रणनीतियों की जमीन तैयार कर रहा है, बल्कि आम जनता और अपने कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देने की भी कोशिश कर रहा है कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार हैं। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे अपने भाषणों में संस्थागत स्वायत्तता के हनन और निष्पक्ष चुनावों के महत्व को लेकर तीखे हमले बोल सकते हैं, जिससे देश की सियासी फिजा में एक बार फिर से गर्माहट आनी तय मानी जा रही है।

राजनीतिक दलों के बीच तेज हुआ वार-पलटवार का दौर और प्रशासनिक तैयारियां

विपक्ष के इस आज के जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर सत्ता पक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। सत्ताधारी दल के नेताओं ने विपक्ष के इस कदम को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित करार देते हुए कहा है कि जब भी चुनाव परिणाम विपक्ष की उम्मीदों के मुताबिक नहीं आते हैं, तो वे बौखलाहट में देश की संवैधानिक संस्थाओं पर अनर्गल आरोप लगाने लगते हैं और अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ने की कोशिश करते हैं। भाजपा का यह भी कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय है जो संविधान के दायरे में रहकर पूरी पारदर्शिता के साथ अपना काम करता है, और इस तरह के राजनीतिक दबाव की राजनीति देश के लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी है ताकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। कुल मिलाकर आज का दिन राजनीतिक सरगर्मी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस प्रदर्शन के बाद देश की सियासत कौन सा नया मोड़ लेती है।