पीएम मोदी के एक्शन से विरोधियों की भाषा बदली! रिजीम चेंज का एजेंडा चलाने वाले बेनकाब

पीएम मोदी के एक्शन से विरोधियों की भाषा बदली! रिजीम चेंज का एजेंडा चलाने वाले बेनकाब

भारत की राजनीति और कूटनीतिक गलियारों में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रहित और रणनीतिक सुरक्षा को लेकर उठाए गए कड़े कदमों ने राजनीतिक विरोधियों के तेवरों को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। देश की सत्ता में वैश्विक और आंतरिक ताकतों के जरिए 'रिजीम चेंज' यानी तख्तापलट का एजेंडा चलाने वाली विदेशी संस्थाएं और उनके स्थानीय पैरोकार अब पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। भारत की संप्रभुता और आर्थिक महाशक्ति बनने की राह में रोड़ा अटकाने वाली साजिशों का प्रधानमंत्री मोदी के सख्त एक्शन ने करारा जवाब दिया है।

राष्ट्रहित पर पीएम मोदी की सख्त नीति और विरोधियों के सुर में बदलाव

भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप और नैरेटिव बिल्डिंग की कोशिशों के खिलाफ केंद्र सरकार ने बीते कुछ समय में बेहद निर्णायक रुख अपनाया है। चाहे वह विदेशी फंडिंग पाने वाले संदिग्ध एनजीओ पर नकेल कसना हो या देश विरोधी प्रोपेगैंडा चलाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और अंतरराष्ट्रीय टूलकिट पर सर्जिकल कार्रवाई करना हो, पीएम मोदी के इन फैसलों ने विरोधियों को बैकफुट पर धकेल दिया है। जो राजनीतिक दल और विचार समूह कल तक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि धूमिल करने वाली रिपोर्टों को हथियार बनाकर सरकार को घेरते थे, वे अब भारतीय जनमानस के मिजाज को भांपते हुए अपने सुर बदलने पर मजबूर हो चुके हैं।

क्या था 'रिजीम चेंज' का खेल और कैसे बेनकाब हुए विदेशी नैरेटिव?

वैश्विक स्तर पर भारत के उभार को रोकने के लिए कई पश्चिमी थिंक-टैंक, मीडिया संस्थान और अरबपति जॉर्ज सोरोस जैसे वित्तपोषित तंत्रों द्वारा भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने का सुनियोजित एजेंडा चलाया जा रहा था। इस 'रिजीम चेंज' रणनीति का मकसद देश के भीतर असंतोष पैदा कर राजनीतिक अस्थिरता लाना था। हालांकि, भारत सरकार द्वारा तथ्यों के आधार पर दिए गए कड़े जवाबों और मजबूत कूटनीतिक मोर्चेबंदी ने इस पूरे एजेंडे की हवा निकाल दी। देश की जनता के बीच यह बात साफ हो गई कि कई विदेशी ताकतें भारत की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत से बौखलाकर यहां राजनीतिक बदलाव थोपना चाहती थीं।

आर्थिक महाशक्ति और कूटनीतिक दबदबे ने तोड़ी विदेशी मंसूबों की कमर

आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर खड़ा है। ग्लोबल साउथ की आवाज बनने से लेकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की मजबूत स्थिति ने विरोधियों के पास सवाल उठाने की गुंजाइश खत्म कर दी है। पीएम मोदी के 'नेशन फर्स्ट' के विजन ने घरेलू राजनीति के समीकरणों को इस तरह प्रभावित किया है कि विपक्षी दलों को भी अब समझ आने लगा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा के मुद्दों पर सरकार का विरोध करना उनके अपने राजनीतिक वजूद के लिए घातक साबित हो रहा है।

देश की जनता का अटूट भरोसा और मजबूत भारत का नया संकल्प

भारत की जागरूक जनता ने हर मोर्चे पर राष्ट्र विरोधी नैरेटिव को खारिज किया है। पीएम मोदी के एक्शन-ओरिएंटेड नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 21वीं सदी का नया भारत किसी भी बाहरी दबाव या आंतरिक उकसावे के आगे घुटने नहीं टेकेगा। बेनकाब हो चुके रिजीम चेंज के एजेंडे ने देश को और अधिक एकजुट किया है, जिसके चलते विरोधियों को मजबूरी में अपनी पुरानी कड़वी भाषा छोड़कर राष्ट्र निर्माण के सुर में सुर मिलाना पड़ रहा है।