ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी के मास्टरस्ट्रोक ने दुनिया के बड़े दिग्गजों को चौंकाया

ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी के मास्टरस्ट्रोक ने दुनिया के बड़े दिग्गजों को चौंकाया

आज के इस दौर में वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के समीकरण बहुत तेजी से बदल रहे हैं, और इन बदलते हुए भू-राजनीतिक परिदृश्य के केंद्र में यदि कोई देश सबसे मजबूती से उभर कर सामने आया है, तो वह भारत है। हाल ही में संपन्न हुए बहुचर्चित ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के दौरान एक बार फिर से इस बात पर मुहर लग गई है कि दुनिया के तमाम बड़े और ताकतवर देश अब वैश्विक मुद्दों, आर्थिक नीतियों और रणनीतिक समझौतों के लिए नई दिल्ली की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक दूरदर्शिता और उनके सटीक फैसलों ने इस वैश्विक मंच पर एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसने पश्चिमी देशों से लेकर पूर्वी महाशक्तियों तक सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक समय था जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका को केवल एक दर्शक या सीमित प्रभाव वाले देश के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज का नया भारत दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों के बीच संवाद का मुख्य केंद्र बन चुका है। ब्रिक्स सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने जिस प्रकार वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंदी दी और आतंकवाद, आर्थिक असमानता और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दों पर दो टूक बातें रखीं, उसने पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भविष्य की वैश्विक व्यवस्था भारत की सहभागिता के बिना अधूरी है।

ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक संबोधन और ग्लोबल साउथ की मजबूत होती आवाज

वैश्विक राजनीति के मानचित्र पर ब्रिक्स संगठन को हमेशा से पश्चिमी देशों के वर्चस्व वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों के एक मजबूत और वैकल्पिक मंच के रूप में देखा जाता रहा है। इस वर्ष आयोजित हुए ब्रिक्स सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति और उनके दिए गए भाषण ने इस पूरे आयोजन की दिशा और दशा दोनों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों, आर्थिक मंदी की आशंकाओं और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के अधिकारों, उनकी आर्थिक सुरक्षा और संप्रभुता का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अब समय आ गया है कि वैश्विक आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले इन देशों को उचित और न्यायसंगत जगह दी जाए। प्रधानमंत्री के इस स्पष्ट और दो टूक संदेश ने न केवल ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों जैसे रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं को प्रभावित किया, बल्कि दुनिया के अन्य विकसित देशों को भी यह संदेश दे दिया कि भारत अब किसी के दबाव में काम करने वाला देश नहीं है, बल्कि वह विश्व मंच पर अपनी शर्तों और समानता के आधार पर अपने हितों की रक्षा करना अच्छी तरह जानता है।

वैश्वीकरण और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की अनिवार्यता पर भारत का अडिग रुख

आधुनिक कूटनीति में बहुपक्षीय संस्थानों की प्रासंगिकता लगातार सवालों के घेरे में आती जा रही है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और अन्य वैश्विक वित्तीय संगठनों के पुराने और सड़े-गले नियम वर्तमान समय की वास्तविकताओं को पूरी तरह से प्रतिबिंबित करने में असफल साबित हो रहे हैं। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गंभीर मुद्दे को बहुत ही बेबाकी और मजबूती के साथ उठाया और दुनिया के सामने यह बात रखी कि जब तक वैश्विक शासन प्रणालियों और संस्थानों में समय के हिसाब से व्यापक सुधार नहीं किए जाते, तब तक दुनिया भर की समकालीन समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटना नामुमकिन होगा। भारत हमेशा से इस बात का पक्षधर रहा है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े संस्थानों में भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए, ताकि वैश्विक स्तर पर संतुलन कायम हो सके। ब्रिक्स के मंच से इस मांग को एक बार फिर से पुरजोर तरीके से उठाकर भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल अपने देश के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरी दुनिया के कल्याण और एक न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण के लिए एक नैतिक और कूटनीतिक नेतृत्व प्रदान करने की पूरी क्षमता रखता है।

आतंकवाद और आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर भारत की दो टूक नीति और वैश्विक कूटनीति पर इसका दूरगामी असर

किसी भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जब तक आपसी सुरक्षा और आतंकवाद जैसे गंभीर खतरों पर ठोस बातचीत न हो, तब तक उस सम्मेलन के मायने अधूरे माने जाते हैं। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी प्रकार के दोहरे मानदंडों को अपनाने वाले देशों को आड़े हाथों लिया और दुनिया के सभी देशों से आह्वान किया कि आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और इसके खिलाफ लड़ाई में बिना किसी भेदभाव के सभी को एकजुट होना पड़ेगा। इसके अलावा, आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में भारत ने आपसी व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) को साझा करने और तकनीकी नवाचारों में एक-दूसरे का सहयोग करने जैसे कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव रखे। इन तमाम पहलों ने यह साबित कर दिया कि भारत आज कूटनीतिक रूप से केवल कड़े बयान देने वाला देश नहीं है, बल्कि वह धरातल पर ऐसे मॉडल पेश कर रहा है जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। कुल मिलाकर, ब्रिक्स सम्मेलन के इस सफल आयोजन और पीएम मोदी की कूटनीतिक सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति में भारत अब एक ऐसा ध्रुव बन चुका है जिसके इर्द-गिर्द दुनिया के तमाम बड़े समीकरण घूम रहे हैं।