दिल्ली में नाबालिग से रेप-हत्या पर भड़का प्रियंका गांधी का गुस्सा, बोलीं- यहां....

दिल्ली में नाबालिग से रेप-हत्या पर भड़का प्रियंका गांधी का गुस्सा, बोलीं- यहां....

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर खड़े हुए गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है, जहां हाल ही में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। राष्ट्रीय राजधानी में एक मासूम नाबालिग बच्ची के साथ दरिंदगी और उसके बाद उसकी निर्मम हत्या की वीभत्स घटना ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। इस अत्यंत संवेदनशील और दर्दनाक मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भारी आक्रोश का माहौल बना हुआ है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिल्ली की कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रियंका गांधी ने अपने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से यह आरोप लगाया है कि राजधानी जैसे संवेदनशील शहर में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि गंभीर अपराध होने के बाद भी थानों में समय पर एफआईआर तक दर्ज नहीं की जाती है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं और पीड़ितों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

राजधानी दिल्ली में बिगड़ती महिला सुरक्षा और पुलिसिया तंत्र की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

किसी भी देश या राज्य की राजधानी को सबसे सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है, क्योंकि वहां देश का शीर्ष प्रशासन, गृह मंत्रालय और मजबूत पुलिस बल तैनात होता है। इसके बावजूद दिल्ली में लगातार बढ़ रहे महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध इस बात की गवाही दे रहे हैं कि जमीन पर सुरक्षा के दावे कितने खोखले साबित हो रहे हैं। नाबालिग बच्ची के साथ हुए इस जघन्य रेप और हत्या के मामले में जब परिजनों ने पुलिस से गुहार लगाई, तो शुरुआती स्तर पर जिस प्रकार की उदासीनता और कथित तौर पर एफआईआर दर्ज करने में हीला-हवाली की बात सामने आई, उसने प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है। प्रियंका गांधी ने इसी संवेदनहीनता पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जब राजधानी की पुलिस ही पीड़ितों की सुध लेने के बजाय मामलों को दबाने या टालने की कोशिश करेगी, तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानून का डर अपराधियों के मन से पूरी तरह समाप्त हो चुका है और पुलिस प्रशासन को यह जवाब देना होगा कि इस तरह की जघन्य वारदातें बार-बार क्यों दोहराई जा रही हैं।

राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत

महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर हमारे देश में राजनीति होना कोई नई बात नहीं है, जब भी कोई ऐसी दर्दनाक घटना सामने आती है, तो सभी राजनीतिक दल अपनी प्रतिक्रिया देते हैं और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है। हालांकि, प्रियंका गांधी और अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए गए इन तीखे सवालों के बाद अब यह समय आ गया है कि राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर धरातल पर ठोस और परिणामोन्मुखी कदम उठाए जाएं। केवल कैंडल मार्च निकालने या कुछ दिनों तक मीडिया में बहस होने से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी नहीं आने वाली है। इसके लिए पुलिस व्यवस्था में आमूल-चूल सुधार, फास्ट ट्रैक अदालतों के माध्यम से मामलों की त्वरित सुनवाई और अपराधियों को जल्द से जल्द मिसाल बनने वाली सजा देने की कानूनी प्रक्रिया को तेज करना होगा। जब तक पुलिस थानों में हर पीड़ित की शिकायत को बिना किसी दबाव या देरी के दर्ज करने की संस्कृति विकसित नहीं होगी, तब तक महिलाओं के मन से डर और असुरक्षा की भावना को दूर करना असंभव बना रहेगा।

देश की बेटियों की सुरक्षा के लिए सामूहिक सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी का संकल्प

दिल्ली में हुई इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर से इस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है कि हमारे समाज और व्यवस्था में अभी भी बहुत सी कमियां बाकी हैं जिन्हें दूर किया जाना बेहद आवश्यक है। केवल कानून बना देने मात्र से तब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं आ सकता जब तक उनकी जमीनी क्रियान्वयन और निगरानी पुख्ता न हो। प्रियंका गांधी द्वारा महिला सुरक्षा के मुद्दे पर उठाए गए इन तीखे और बेबाक सवालों ने एक बार फिर से पूरे देश का ध्यान इस तरफ आकर्षित किया है कि हमें अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए अपनी प्राथमिकताओं को बदलना होगा। सरकार, न्यायपालिका, पुलिस प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर एक ऐसा सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण तैयार करना होगा जहां हर बच्ची बिना किसी डर के खुलकर सांस ले सके और जी सके। इस दिशा में प्रशासन को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि इस मामले के दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में खड़ा करके कठोरतम सजा दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी दुस्साहसिक घटना को दोहराने से पहले अपराधी सौ बार सोचें।