राहुल गांधी ने बढ़ाई दोस्ती का हाथ, क्या विपक्षी खेमे में शामिल होगी कॉकरोच जनता पार्टी?

राहुल गांधी ने बढ़ाई दोस्ती का हाथ, क्या विपक्षी खेमे में शामिल होगी कॉकरोच जनता पार्टी?

नीट पेपर लीक और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। CJP की मजबूत होती मोबिलाइजेशन पावर और ज़मीनी पकड़ को देखते हुए विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके से हाथ मिलाने की पहल की है, ताकि विपक्षी एकजुटता को और मजबूत किया जा सके।

शुरुआत में CJP को लेकर कांग्रेस खेमे में संशय का माहौल था, लेकिन अब पार्टी इस नई राजनीतिक ताकत को अपने पाले में लाने के लिए उत्सुक नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस ने इंडिया ब्लॉक के लिए आयोजित एक विशेष हाई-टी में अभिजीत दिपके को आमंत्रित किया था। हालांकि, शुरुआती खबरों के अनुसार CJP संस्थापक की तरफ से इस आमंत्रण पर खास उत्साह नहीं दिखाया गया। इस बीच, दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए कांग्रेस ने वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण से मध्यस्थता की गुहार लगाई है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए गए विरोध प्रदर्शन की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखी थी। कांग्रेस के रुख में नरमी और बदलाव के संकेत तब साफ हुए जब राहुल गांधी ने यह बयान दिया कि संविधान की रक्षा के लिए उठने वाली हर आवाज एक ही आंदोलन का हिस्सा है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि संविधान बचाने के लिए काम करने वाले किसी भी संगठन या व्यक्ति के साथ कांग्रेस चट्टान की तरह खड़ी है और इसके बदले वह आपसी सहयोग की उम्मीद भी रखती है।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस का मानना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग जैसे मुद्दों पर सभी समान विचारधारा वाली ताकतों को एक मंच पर आना चाहिए। हालांकि, जब कांग्रेस की तरफ से संपर्क साधा गया, तब CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके महाराष्ट्र में थे, जबकि संगठन के कुछ अन्य प्रमुख नेता जंतर-मंतर पर अचानक हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस हिरासत में आ चुके थे। भले ही CJP की तरफ से अभी खुलकर हामी नहीं भरी गई है, लेकिन इस सियासी पहल ने देश की राजधानी में नए राजनीतिक समीकरणों की सुगबुगाहट तेज कर दी है।